रामालय फाउंडेशन की पहल और सीएसआईआर –एनबीआरई के वैज्ञानिक नेतृत्व की प्रशंसा
पटना , 20 नवंबर (आरएनएस)।जिलाधिकारी श्री तरनजोत सिंह, आईएएस ने ग्राम रामगंज, प्रखंड कुमारखण्ड में चल रही ‘वैज्ञानिक मधुमक्खी प्रबंधन एवं जैव-विविधता संवर्धन परियोजना’ का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे उत्तर बिहार में वैज्ञानिक शहद उत्पादन गलियारे और जैव-विविधता पुनर्स्थापन की दिशा में परिवर्तनकारी पहल बताया।जिलाधिकारी महोदय ने रामालय फाउंडेशन और इसकी सामाजिक इकाई ‘अर्थ एंड फॉरेस्ट’ की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रशांत कुमार द्वारा समाज को प्रकृति, जैव-विविधता और वैज्ञानिक आजीविका से जोड़ने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है।डीएम ने सीएसआईआर –एनबीआरई /एनबीआरएल लखनऊ की वैज्ञानिक टीम की सराहना की, जो सीएसआईआर फ्लोरिकल्चर मिशन फेज -II के तहत इस परियोजना का मार्गदर्शन कर रही है। उन्होंने मुख्य वैज्ञानिक डॉ. बिकर्मा सिंह और डॉ. सुशील कुमार द्वारा किसानों को दी जा रही वैज्ञानिक प्रशिक्षण, परागण पारिस्थितिकी तथा वनस्पति योजना के लिए धन्यवाद दिया।रमालया फाउंडेशन और सीएसआईआर –एनबीआरई के संयुक्त सहयोग से संचालित इस परियोजना में 40 किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा 200 मधुमक्खी बॉक्स और जैव-विविधता क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं।

