जगदलपुर, 21 अगस्त (आरएनएस)। बस्तर के सबसे कुख्यात नक्सली कमांडर मांडवी हिड़मा की मौत अब नए विवाद का रूप ले चुकी है। नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय ने प्रेस नोट जारी कर सुरक्षा बलों और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि हिड़मा की मौत किसी वास्तविक मुठभेड़ में नहीं हुई, बल्कि यह योजनाबद्ध फर्जी कार्रवाई थी। इसी के साथ उन्होंने 23 नवंबर को देशव्यापी प्रतिरोध दिवस मनाने का ऐलान किया है। अभय का कहना है कि हिड़मा इलाज के लिए विजयवाड़ा गया था, जहां उसे गुप्त रूप से पकड़कर सरेंडर कराने की कोशिश की गई। सुरक्षा बलों की यह कोशिश सफल न होने पर हिड़मा और उसके साथ मौजूद 6 अन्य नक्सलियों को मार दिया गया। केंद्रीय कमेटी ने इसे संगठन के शीर्ष नेतृत्व को कमजोर करने की बड़ी रणनीति बताया है। प्रेस नोट में पुलिस पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आम जनता से विरोध दिवस में शामिल होने की अपील की गई है। इधर सुरक्षा एजेंसियों ने अभय के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें राजनीतिक और भ्रामक बताया है। हिड़मा की मौत के बाद पहले से हाई अलर्ट पर चल रहे बस्तर में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि जिस ऑपरेशन में हिड़मा मारा गया, वह पूरी तरह प्रमाणिक, वैधानिक और खुफिया इनपुट पर आधारित कार्रवाई थी।
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