प्रयागराज 21 नवंबर (आरएनएस)। भारतीय ज्ञान परंपरा की सांस्कृतिक विरासत : श्रीमद्भगवद्गीता विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन जगत तारन गल्र्स डिग्री कॉलेज प्रयागराज में आज संस्कृत विभाग एवं प्राचीन इतिहास विभाग द्वारा विश्व विरासत सप्ताह के अन्तर्गत किया गया। विशिष्ट वक्ता प्रोफेसर राजलक्ष्मी वर्मा (पूर्व विभागाध्यक्ष संस्कृत विभाग , इलाहाबाद विश्वविद्यालय) रहीं। अतिथि का स्वागत प्राचार्या प्रोफेसर आशिमा घोष ने किया।
आयोजित सत्र में प्रोफेसर राजलक्ष्मी वर्मा ने गीता के नैतिक और आध्यात्मिक संदेशों और सांस्कृतिक परंपरा पर प्रकाश डाला। वक्ता द्वारा रामचरित और कृष्ण चरित की उदात्तता को ग्रहण करने की प्रेरणा दी। चार पुरुषार्थ, ज्ञान- कर्म- भक्ति और योग को परिभाषित करते हुए वक्ता नेए यह सिद्ध किया कि गीता शास्त्र भी है और कला भी।
अतिथि परिचय डॉक्टर प्रमा द्विवेदी ने दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो . मीनाश्री यादव ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर रतन कुमारी वर्मा द्वारा दिया गया। इस अवसर पर डॉ सत्य प्रकाश श्रीवास्तव (सीएमपी), डॉ अरुणेय मिश्रा (ईसीसी), डॉ ब्रह्मदेव द्विवेदी, डॉ उपासना पांडे (सेंट एंथोनी), कु. आरती बनर्जी तथा महाविद्यालय के शिक्षक गण प्रो. अर्चना पाल, प्रो. अंशुमाला मिश्रा, सुश्री संगीता सहगल, डा. अजिता ओझा, डा. निर्मला गुप्ता, डा. फातिमा नूरी, डा. कस्तूरी भारद्वाज, डा. अंजलि शिवहरे, डा. विजयलक्ष्मी, डा. अनुराग पाण्डेय, डा.सुकृति मिश्रा, डा. माधुरी राठौर,डा. अंकिता चतुर्वेदी, डा.शालिनी सिंह, डा. शारदा, शोधार्थीगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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