अजय दीक्षित
मतदाता सूची गहन परीक्षण को लेकर पश्चिमी बंगाल में भगदड़ मच गयी है, भारी संख्या में संदेहास्पद लोग पश्चिमी बंगाल छोड़कर बांग्लादेश, बिहार, ओडिशा चोरी छिपे जा रहे हैं।यह सिलसिला पूरे प्रदेश से हो रहा है।जबकि चुनाव आयोग की मशीनरी ने 99 फीसदी मतदाताओं को एस आई आर के फॉर्म उपलब्ध करा दिए हैं ये फॉर्म बीएलओ के पास पांच दिसम्बर 2025 तक जमा होने है ताकि कंप्यूटर में दर्ज हो जाए। उल्लेखनीय है कि अभी पश्चिमी बंगाल में सात करोड़ छियासत लाख मतदाता सूचियों में दर्ज है। दूसरी ओर पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राहुल गांधी वोट चोरी रैली 22 नवंबर को कोलकाता में आयोजित कर रहे हैं। पश्चिमी बंगाल में चुनाव आयोग, केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार आमने सामने आ गए हैं। राज्य सरकार की मशीनरी असहयोग पर उतारू है। बताया जाता है कि पश्चिमी बंगाल में 15 से 20 फीसदी मतदाता सूचियों में से हट सकते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को सूचित किया है कि गांव गांव फर्जी आधार कार्ड, बीपीएल कार्ड, भारी संख्या में जलाए जा रहे हैं। कोलकाता से प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स ने अपने 14 नवम्बर के अंक में फ्रंट पेज पर लिखा है कि “हाऊ इट इस पॉसिबल” इस रिपोर्ट में जगह जगह आग में अधजले आधार कार्ड, बीपीएल कार्ड के चित्र है।
सूत्रों के मुताबिक अकेले मुशिदाबाद जिले में दो लाख फर्जी मतदाता है और अन्य जिलों में तो और भी अधिक है।
आइबी रिपोर्ट के मुताबिक लोग मतदाता सूचियों में से हटाए जाने और उसके बाद डिपोर्ट किए जाने से डरे हुए हैं। वास्तविक दृश्य और भी भयाभय है क्योंकि यह सब राज्य सरकार की मर्जी से हो रहा था। आजादी के बाद से पहले बांग्लादेश से लोग पलायन कर रोजगार की तलाश में भारत आए और यह सिलसिला 70 के दशक में तेज हुआ । विशेषकर मुस्लिम समाज के लोग लगातार आते रहे। तत्कालीन समय में सरकार के पास एक राशन कार्ड ही प्रमाण पत्र था जो नागरिकता को सत्यापित करता था पूरे देश में यही प्रणाली थी । पश्चिमी बंगाल में तब कांग्रेस का शासन होता था और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मुख्य विपक्षीय दल था । लेकिन 1977 में सीपीआई से अलग होकर सीपीएम ने सत्ता हस्तांतरण कर लिया। बताया जाता है उसके बाद सीपीएम ने अपना वोट बैंक बनाने के लिए शरणार्थी को नागरिक बनाने के लिए राशन कार्ड, बीपीएल कार्ड, दिए। उसके चलते सीपीएम 2011 तक सत्ता में रही और अब तक पूरे बंगाल में एक करोड़ मुस्लिम शिफ्ट हो गए। 2011 के बाद यही तबका तुड़मूल कांग्रेस में चला गया। लेकिन 2014 के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने खोजबीन शुरू की और एजेंसीज को लगाया गया।2021 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने सर्वाधिक 74 सीट जीती थी और तब ही मालूम हुआ कि एक तबका जो भारतीय नहीं है वह फर्जी मतदाता सूचियों में दर्ज है। इस लिए भगदड़ मच गयी है कि अब भारत में रहना आसान नहीं है क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्रालय राष्ट्रीय नागरिक कानून बना रहा है और जो लोग गैर भारतीय है उन्हे डिपोर्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी,राहुल गांधी इस लिए वोट चोरी रैली निकाल रहे हैं कि उनका कोर मतदाता सूचियों से विलोपित हो रहा है और डिपोर्ट करने से वे अधिक परेशान हैं लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि जो भारतीय नहीं है वह इस देश के लोग के हितों पर कब्जा कर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी तो बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना है क्योंकि पश्चिमी बंगाल में ममता बनर्जी ने कांग्रेस को एक भी सीट देने से इनकार कर दिया है। बांग्लादेश के जो हालत हैं उससे वहां और पश्चिमी बंगाल के हिंदू बहुत परेशान हैं क्योंकि उनके रिश्तेदार बांग्लादेश में रहते हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री गिरराज सिंह तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाए हैं कि वह बांग्लादेश के इस्लामी जमातियों से मिल कर काम कर रही है।
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