खरगोन 27 नवंबर (आरएनएस)। पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कसरावद विधायक सचिन यादव द्वारा सरकार पर विधानसभा सत्र को छोटा करने को लेकर सवाल उठाए हैं। यादव ने कहा कि विधानसभा सत्र को अत्यंत छोटा करना सरकार की पूरी तरह सोची-समझी चाल है। जनता के ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर बहस से बचने के लिए सरकार लगातार पीछे हट रही है। राज्य में समस्याएँ बड़ी हैं, हालात गंभीर हैं। लेकिन दिसम्बर के सत्र को मात्र 4 बैठकों का रखा गया है। यह सरकार की नाकामियों को छिपाने और जवाबदेही से बचने का प्रयास है।
विधायक सचिन यादव ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय विधानसभा सत्र महीनों तक चला करते थे, जहाँ जनता से जुड़े हर मुद्दे पर खुली और गहन चर्चा होती थी। आज सत्र की अवधि लगातार घटती जा रही है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के कमजोर होने का संकेत है। अन्नदाताओं की परेशानियाँ चरम पर हों, खाद-यूरिया के लिए किसानों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़े, सोयाबीन-मक्का की एमएसपी पर खरीदी न हो, धान-कपास के उचित दाम न मिलें, कानून-व्यवस्था निरंतर बिगड़ती जाए, स्वास्थ्य सेवाएँ वेंटिलेटर पर पहुँच चुकी हों तब विधानसभा में चर्चा से बचना लोकतंत्र का अपमान और जनता के साथ अन्याय है।
सरकार विज्ञापनों में तो बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन विधानसभा में जनता के सवालों पर एक शब्द तक नहीं बोल पाती। छोटा सत्र सरकार की कमजोरी, डर और असफलता का प्रमाण है। पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कसरावद विधायक सचिन यादव ने अपने जारी वक्तव्य में कहा कि “विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है। यह वही स्थान है जहाँ जनता की आवाज़ बुलंद होती है, समस्याओं का समाधान खोजा जाता है और सरकार से जवाबदेही तय होती है। परंतु वर्तमान सरकार इस मंदिर को औपचारिकता बनाकर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है। छोटा सत्र आयोजित कर सरकार अपनी विफलताओं को छिपाना चाहती है। हम जनता के सवालों से सरकार को भागने नहीं देंगे। किसान, नौजवान, महिलाएँ, व्यापारी हर वर्ग की आवाज़ विधानसभा में गूँजेगी। छोटा सत्र नहीं चलेगा, सरकार को हर हाल में जवाब देना ही पड़ेगा।
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