अंबिकापुर 28 नवंबर 2025(आरएनएस) प्रदेश का “शिमला” कहलाने वाला मैनपाट इन दिनों पर्यावरण और विकास के मुद्दे पर राष्ट्रीय सुर्खियों में है। यहां प्रस्तावित माइनिंग प्रोजेक्ट और रिफाइनरी प्लांट को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीणों में भारी असंतोष है। प्रशासन द्वारा 30 नवंबर और 2 दिसंबर को जनसुनवाई आयोजित की जा रही है, लेकिन ग्रामीण परतंत्र दबाव का आरोप लगाकर इसका तीव्र विरोध कर रहे हैं।पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने इस मामले पर सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी प्लांट की स्थापना से पूर्व आवश्यक है कि भूमि स्वामियों की सहमति ली जाए। निजी परियोजनाओं के लिए कम से कम 80% भूमि मालिकों की सहमति चाहिए, वहीं शासकीय परियोजना के लिए 70% स्वामियों की अनुमति अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वेच्छा से भूमि देना प्रक्रियागत रूप से सही है, लेकिन जबरदस्ती और दबाव से सहमति लेना पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य है।सिंहदेव ने मैनपाट की पर्यावरणीय संवेदनशीलता पर भी जोर देते हुए कहा कि यह क्षेत्र न केवल प्राकृतिक खूबसूरती बल्कि पर्यटन और जैवविविधता का केंद्र है। माइनिंग और रिफाइनरी संयंत्र यहां के जलस्तर, पर्यावरण और पर्यटन संभावनाओं के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने भाजपा के सांसदों और मंत्रियों से सवाल किया कि जो मैनपाट को पर्यटन के रूप में विकसित करने की बात करते हैं, क्या वे इस क्षेत्र की अस्मिता को संकट में डालने वाले फैसलों का समर्थन करेंगे?ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि वे मैनपाट की पर्यावरणीय और सांस्कृतिक विरासत के साथ किसी भी प्रकार के खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं करेंगे और यदि जरूरत पड़ी तो सशक्त आंदोलन भी करेंगे।अब समूचा प्रदेश प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं कि क्या जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस विवादित प्रोजेक्ट को स्थगित किया जाएगा या पर्यटन विकास की बातें केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगी।
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