नई दिल्ली,28 नवंबर (आरएनएस)। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक, अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा, और हवा तथा पानी को बुनियादी अधिकार बताते हुए एयर और वाटर प्यूरीफ़ायर पर 18 फीसद जीएसटी को तत्काल हटाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जब सरकारें नागरिकों को साफ़ हवा और साफ़ पानी मुहैया कराने में विफल हो रही हैं, तो उन्हें कम से कम उन उपकरणों पर भारी टैक्स नहीं वसूलना चाहिए जिनका इस्तेमाल लोग अपनी जान बचाने के लिए कर रहे हैं. दिल्ली में बीजेपी की सरकार ने गत अक्टूबर माह में सचिवालय में मंत्रियों के दफ्तरों के लिए 15 नए एयर प्यूरिफ़ायर खरीदा था, एक प्यूरिफ़ायर की कीमत 36,345 रुपये है.
केजरीवाल ने एक्स पर लिखा है कि उत्तर भारत, विशेष रूप से दिल्ली में जानलेवा हो चुके प्रदूषण के स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि साफ हवा और साफ पानी हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है, लेकिन सरकारें समाधान देने की बजाय जनता से टैक्स वसूल रही है. केजरीवाल ने इस अन्याय को उजागर करते हुए कहा, लोग अपने परिवार को प्रदूषण से बचाने के लिए एयर प्यूरीफ़ायर लेने जाते हैं, और वहाँ पता चलता है कि सरकार उस पर 18 फीसद जीएसटी वसूल रही है. यह सरासर अन्याय है. यह उच्च कर दर उन लाखों परिवारों की जेब पर सीधा बोझ डाल रही है जो प्रदूषण के खतरनाक स्तर से बचने के लिए मजबूरन प्यूरीफायर खरीद रहे हैं.
केजरीवाल ने केंद्र सरकार से स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि एयर और वॉटर प्यूरीफ़ायर पर लगाया गया जीएसटी तुरंत हटाया जाए. उन्होंने केंद्र को सीधे चुनौती देते हुए कहा, समाधान नहीं दे सकते तो कम से कम जनता की जेब पर बोझ डालना बंद कीजिए. केजरीवाल की यह मांग ऐसे समय में आई है जब दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में बना हुआ है. पानी की गुणवत्ता भी कई इलाकों में चिंता का विषय है. विशेषज्ञों का मानना है कि एयर और वॉटर प्यूरीफ़ायर आज लग्जरी की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन बचाने की आवश्यकता बन गए हैं, और इन पर उच्च टैक्स लगाना जन-स्वास्थ्य के सिद्धांतों के खिलाफ है.
दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति अभी भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है, खासकर सर्दियों की शुरुआत के साथ. वायु गुणवत्ता सूचकांक अक्सर बहुत खराब (301-400) या गंभीर (401+) श्रेणियों में दर्ज किया जाता है. कई इलाकों में सूचकांक 400 के पार भी चला जाता है, जो खतरनाक स्तर के करीब होता है. दिल्ली के प्रदूषण के मुख्य कारकों में पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना, वाहन उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल, और धीमी हवा की गति तथा तापमान में गिरावट, जो प्रदूषकों को निचले वातावरण में फँसा देती है, यह शामिल हैं.
बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में, लोग पीएम 2.5 और अन्य प्रदूषकों के स्वास्थ्य पर पडऩे वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में अधिक जागरूक हुए हैं. वे अपने घरों को सुरक्षित क्षेत्र बनाने के लिए निवेश कर रहे हैं. मांग में भारी उछाल के चलते दिवाली से पहले और बाद में कई कंपनियों ने रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की है. कुछ खुदरा विक्रेताओं ने मांग में सामान्य दिनों की तुलना में पाँच गुना तक वृद्धि होने की सूचना दी है, जिसके कारण कुछ दुकानों से स्टॉक खत्म होने की खबरें भी आई हैं. अब स्मार्ट एयर प्यूरीफ़ायर की मांग बढ़ी है, जिन्हें स्मार्टफोन ऐप के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है और जो पीएम 2.5 स्तरों की लाइव निगरानी करते हैं.
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