वरीय आईपीएस अधिकारी ने किया यूपीएससी के खिलाफ मामला
कोलकाता,29 नवंबर (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक के रूप में नियुक्ति में भेदभाव के आरोप से हड़कंप मच गया है। बंगाल के वरीय आईपीएस राजेश का दावा है कि वरीयता के हिसाब से उनका नाम टॉप तीन में होना चाहिए था। हालांकि, यूपीएससी का तर्क है कि जब लिस्ट भेजी गई थी, तब उनका सर्विस पीरियड 6 महीने से ज़्यादा था। राजेश कुमार ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में केस किया है। उन्होंने सवाल उठाए हैं कि इस राज्य में डीजी की नियुक्ति के लिए उनके नाम पर विचार क्यों नहीं किया गया। आईपीएस राजेश का दावा है कि सीनियरिटी के हिसाब से उनका नाम पहले तीन में होना चाहिए था। हालांकि, यूपीएससी का तर्क है कि जब लिस्ट भेजी गई थी, तब उनका सर्विस पीरियड 6 महीने से ज़्यादा था। 1990 बैच के आईपीएस ऑफिसर राजेश कुमार ने यूपीएससी के फैसले को चुनौती देते हुए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में एक पिटीशन फाइल की है। उनका आरोप है कि उन्हें और दो सीनियर ऑफिसर – राजीव कुमार (अभी के एक्टिंग डीजी) और रणबीर कुमार – को पैनल से गैर-कानूनी तरीके से बाहर रखा गया। जब 27 दिसंबर 2023 को डीजीपी (एचोपीएफ) की पोस्ट खाली हुई, तो तीनों सीनियर अधिकारियों की सर्विस छह महीने से ज़्यादा बची थी, जो एक ज़रूरी क्वालिफिकेशन है। फिर जुलाई 2025 में, राज्य सरकार ने यूपीएससी को 10 एलिजिबल आईपीएस अधिकारियों के नाम भेजे, जिनमें से सभी की सर्विस छह महीने से ज़्यादा बची थी। लेकिन 30 अक्टूबर 2025 को हुई मीटिंग में यूपीएससी ने तर्क दिया कि मीटिंग वाले दिन तीन अधिकारियों की सर्विस छह महीने से ज़्यादा नहीं बची थी, इसलिए उन्हें हटा दिया गया। बाद में, ज़्यादा बची हुई सर्विस वाले अधिकारियों के नामों की सिफारिश की गई। शिकायत करने वाले आईपीएस राजेश कुमार ने दावा किया कि यह फैसला भेदभाव वाला और गलत था। बहरहाल जो भी हो राजेश के पुलिस करियर की बात करे तो उनका सफर प्रोबेशनर 1990 से 1993, एएसपी 1993 से 1994, एडिशनल एसपी 1994 से 1998, एसपी 1998 से 2005, डीआईजी 2005 से 2007, आईजी 2007 से 2014, एडीजी 2014 से अब तक तय किया। जबकि वह अभी लाइब्रेरी और मास एजुकेशन डिपार्टमेंट में प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे हैं। उनका कार्यकाल लगभग तीन महीने का है। इस वरीय आीपीएस ऑफिसर के अवॉर्ड्स की लिस्ट में प्रेसिडेंट अवॉर्ड और चीफ मिनिस्टर पुलिस मेडल शामिल हैं।
००
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

