लखनऊ ,29 नवंबर (आरएनएस)। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा के दौरान उत्पन्न जलभराव की समस्या को रोकने के लिए नाली और पर्याप्त सड़कों का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। कई स्थानों पर बरसात के दिनों में पानी भरने से ग्रामीणों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गांवों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और जहां भी जलभराव की आशंका हो, वहां नालियों एवं आंतरिक सड़कों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा गाइडलाइन में निहित प्रावधानों के अनुरूप इन कार्यों को उच्च प्राथमिकता में रखते हुए तेजी से पूरा किया जाए, ताकि नागरिक सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी न रहने पाए।ग्राम्य विकास आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी ने बताया कि शासन द्वारा सभी जिलाधिकारियों और जिला कार्यक्रम समन्वयकों (मनरेगा) को समय-समय पर जारी निर्देशों के तहत स्पष्ट कहा गया है कि ‘ऑपरेशन कायाकल्पÓ के अंतर्गत मनरेगा, राज्य वित्त, चतुर्थ राज्य वित्त और 14वें वित्त आयोग की धनराशि का समन्वय करते हुए प्रत्येक ग्राम पंचायत में कार्ययोजना के अनुसार स्थलों का चिन्हांकन किया जाए। इसके बाद आवश्यकतानुसार पक्का खड़ंजा, नाली और आंतरिक सड़कों का निर्माण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने बताया कि मनरेगा ऑपरेशनल गाइडलाइन और मास्टर सर्कुलर के अनुसार कार्य करवाने की अपेक्षा की गई है। चूंकि मनरेगा में श्रम-सामग्री अनुपात 60:40 निर्धारित है, इसलिए सामग्री मद सीमित रहती है। इस सीमित सामग्री मद का उपयोग नागरिक सुविधाओं से संबंधित आंतरिक सड़कों और जल प्रवाह हेतु नालियों के निर्माण में ही प्राथमिकता के साथ किया जाना चाहिए।अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गांवों में नाली और आंतरिक सड़कों की स्थिति का विस्तृत आकलन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सामग्री मद का अधिकतम उपयोग इन्हीं कार्यों पर हो। किसी भी दशा में ग्रामों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न होने पाए और न ही आंतरिक सड़कों का अभाव रहे।
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