लखनऊ 30 नवंबर (आरएनएस ) समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एसआईआर (स्पेशल समरी रिवीजन) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया प्रदेश के करोड़ों मतदाताओं के लिए मुसीबत बन चुकी है और इसमें निर्धारित समय सीमा में सही व व्यापक सत्यापन करना संभव नहीं है।अखिलेश यादव के अनुसार उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में मात्र एक महीने के भीतर करीब 16 करोड़ मतदाताओं का विवरण जुटाना और उसका सत्यापन कर पाना व्यावहारिक रूप से असंभव है। बीएलओ को अतिरिक्त काम का भारी बोझ उठाना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर दिखाई दे रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने 04 से 11 दिसम्बर 2025 तक एसआईआर का समय बढ़ाकर कोई बड़ा या व्यावहारिक कदम नहीं उठाया है, जबकि समाजवादी पार्टी ने समय सीमा तीन महीने करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि आयोग ने मतदाताओं की वास्तविक परेशानियों पर ध्यान नहीं दिया, जिससे यह सवाल उठता है कि आयोग कहीं संवेदनाशून्य तो नहीं हो गया है।अखिलेश यादव ने आगे कहा कि बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में भी बड़ी संख्या में लोगों के मताधिकार कटने की आशंका बढ़ती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर को भाजपा के राजनीतिक हितों के मुताबिक इस्तेमाल करने की तैयारी दिख रही है, ताकि विपक्षी मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जा सके। उन्होंने चेताया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ ऐसा खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।उन्होंने बीएलओ की बढ़ती परेशानियों और मौतों पर भी चिंता जताई। प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक बीएलओ की असामयिक मौतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नौकरी के दबाव और धमकियों के कारण कई बीएलओ अवसाद में पहुंच गए और कुछ आत्महत्या तक कर चुके हैं। सबसे दुखद स्थिति यह है कि मृतक बीएलओ को सेवा से पृथक दिखाकर उन्हें सरकारी सहायता से भी वंचित करने की कोशिशें हो रही हैं।सपा अध्यक्ष ने कहा कि एसआईआर बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और इसमें किसी भी तरह की कमी लोगों के संवैधानिक अधिकारों—जैसे नागरिकता का अधिकार, वोट का अधिकार और आरक्षण जैसी मूलभूत सुविधाओं—को सीधे प्रभावित कर सकती है।अखिलेश यादव ने मांग की कि यदि चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से एसआईआर कराना चाहता है, तो उत्तर प्रदेश के करोड़ों मतदाताओं के लिए इसकी समय सीमा कम से कम तीन महीने की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग को मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति वोट डालने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न हो। उन्होंने चेताया कि यदि आयोग भाजपा की साजिशों से सावधान नहीं रहा, तो उस पर भी संदेह की उंगली उठेगी।
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