गोण्डा 30 नवंबर। जनपद के विकास खंड मुजेहना क्षेत्र अंतर्गत मझरेती की वसुधा पर प्रवाहित हो रही श्री मद्भागवत कथा में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी साक्षात् प्रवाहित होती हुई दृष्टिगोचर हुई। कथा वाचक आचार्य बाग़ीश कुमार तिवारी के दिव्य मुखारविंद से प्रवाहित श्रीमद्भागवत कथा के अमृतमय श्रवण से सम्पूर्ण परिसर भक्तिरस में सराबोर हो उठा। इस पावन अवसर पर महाराज श्री ने ध्रुव चरित, प्रह्लाद चरित, अजामिलोपाख्यान, जड़भरत संवाद, गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामनावतार, श्रीराम कथा एवं भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव जैसे गूढ़ हृदयस्पर्शी प्रसंगों का अनुपम निरूपण किया। उनके दिव्य वचनों ने न केवल श्रोताओं के हृदयों में भक्ति की भावज्योति प्रज्वलित की, अपितु यह भी उद्घघोषित किया कि ‘धर्म किसी सीमारेखा का नहीं, बल्कि समस्त मानवता का आभूषण है।Óपूज्य आचार्य जी ने अपने मृदुल वचनों में कहा कि –
ध्रुव ने अल्पायु में ही ईश्वर प्राप्ति का अमर आदर्श स्थापित किया, प्रह्लाद ने विपत्ति में अडिग भक्ति का प्रतीक बनकर दिखाया, अजामिल ने नामस्मरण की महिमा से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया, जड़भरत ने संसार की मोहजाल से विमुक्त रहकर आत्मसाक्षात्कार की अनुभूति दी, वहीं गजेंद्र मोक्ष प्रसंग यह प्रतिपादित करता है कि संकट की अंतिम अवस्था में भी भगवदाश्रय ही जीवन का परम संबल है। उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन का रहस्य केवल देवासुर संग्राम नहीं, बल्कि मानव जीवन के अंतर्मंथन का रूपक है। वामनावतार में विनम्रता की विजय, रामकथा में धर्म की स्थापना और कृष्ण जन्मोत्सव में लीला एवं प्रेम का उत्सव निहित है।कथास्थल पर चारों ओर जय-जयकार, हरिनाम-संकीर्तन और शंखध्वनि के संग दिव्य आह्लाद का वातावरण निर्मित रहा। गांव में सुसज्जित व्यास पीठ पर जब श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग प्रारम्भ हुआ, तो सम्पूर्ण सभागार नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के उद्घोष से गूँज उठा। श्रोताओं की आंखें आद्र्र थीं, और हृदयों में भक्ति का ज्वार उमड़ पड़ा।
आयोजक –अलख राम यादव एवं उनकी धर्म पत्नी व पुत्र पूजा राम यादव द्वारा इस सात्त्विक आयोजन की भव्य व्यवस्था की गई थी। इसके साथ आचार्य बागीश तिवारी ने कहा— धर्म की परिभाषा किसी एक जाति, पंथ या मजहब की सीमा में नहीं बंधी। जो मनुष्य प्रेम, करुणा, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलता है, वही सच्चा धर्मात्मा है। श्रीमद्भागवत का सार यही है — ‘सर्वभूतेषु ईश्वरदर्शनम्Ó। मौके पर उपस्थित कथा श्रोताओं ने भक्ति आनंदमय वातावरण में प्रभु का प्रसाद ग्रहण किया।
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