नईदिल्ली,01 दिसंबर (आरएनएस)। दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीएसएटी) द्वारा टैरिफ की गणना के फॉर्मूले में संशोधन के बाद अब दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों से उड़ान भरने वाले यात्रियों को जल्द ही उपयोगकर्ता शुल्क में भारी वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। नए फॉर्मूले के कारण उपयोगकर्ता विकास शुल्क (यूडीएफ) 22 गुना तक बढ़ सकता है, जिससे हवाई यात्रा काफी महंगी हो जाएगी। हालांकि, एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (एईआरए) ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
यह विवाद वित्त वर्ष 2009 से वित्त वर्ष 2014 के बीच की 5 साल की टैरिफ अवधि से जुड़ा है, जिसके दौरान दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया टैरिफ बकाया था। टीडीएसएटी के आदेश ने यात्रियों से बढ़े हुए शुल्क के जरिए इस राशि की वसूली का रास्ता खोल दिया है। हालांकि, एईआरए समेत कई घरेलू और विदेशी एयरलाइंस ने आदेश को चुनौती दी है। जिस पर बुधवार को सुनवाई होने वाली है।
टीडीएसएटी का यह आदेश लागू होता है, तो दिल्ली हवाई अड्डे पर घरेलू यात्रियों के लिए यूडीएफ मौजूदा 261-129 रुपये से बढ़कर 1,261 रुपये तक और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए 656 से बढ़कर 6,356 तक हो सकता है। मुंबई हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए शुल्क 3,856 और घरेलू यात्रियों के लिए 175 तक बढ़ सकता है। विवाद के केंद्र में काल्पनिक नियामक परिसंपत्ति आधार (एचआरएबी) है, जो एईआरए द्वारा प्रयुक्त एक काल्पनिक मूल्यांकन प्रणाली है।
उद्योग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि टीडीएसएटी के आदेश के कार्यान्वयन से हवाई टिकट महंगे हो जाएंगे तथा भारत के व्यस्ततम हवाई अड्डों पर यात्रियों की संख्या में भी भारी कमी आ सकती है। एयरलाइंस का तर्क है कि यह फैसला उपभोक्ता विरोधी है और यह यात्रियों पर अनुचित बोझ डालता है। अंतिम निर्णय बुधवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगा। हालांकि, आदेश के लागू होने की संभावना काफी अधिक है।
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