नईदिल्ली ,01 दिसंबर (आरएनएस) सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी की देशव्यापी जांच शुरू करने का आदेश दिया है, जिसमें हाल के महीनों में कई पीडि़तों से सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी गई गई है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता बताते हुए सभी राज्य सरकारों को इस मामले की जांच के लिए सीबीआई को आवश्यक सहमति प्रदान के भी निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी पर देश की प्रमुख जांच एजेंसी को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। इसलिए, हम स्पष्ट निर्देश देते हैं कि सीबीआई पहले इन मामलों की जांच करेगी। अन्य प्रकार की साइबर धोखाधड़ी की जांच अगले चरणों में की जाएगी। कोर्ट ने कहा, सभी विपक्षी दलों के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों को इस जांच में सहयोग करते हुए सीबीआई को आवश्यक सहमति भी देनी होगी।
कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक को भी नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है कि साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों को तुरंत फ्रीज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस या मशीन लर्निंग तकनीकों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है। इसी तरह कोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी मध्यस्थों को निर्देश दिया कि वे डिजिटल अरेस्ट अपराधों की जांच में सीबीआई को पूर्ण विवरण और पूर्ण सहयोग प्रदान करें, ताकि दोषियों पर र्कारवाई हो सके।
कोर्ट ने सीबीआई को यह भी कहा गया कि वह विदेशी कर पनाहगाहों से संचालित साइबर अपराधियों पर नजर रखने के लिए इंटरपोल से सहायता ले। इसी तरह दूरसंचार विभाग से यह सुनिश्चित करने को कहा कि दूरसंचार ऑपरेटर एक ही उपयोगकर्ता को एक से अधिक सिम कार्ड जारी न करें, जिससे साइबर अपराधों के लिए उनका दुरुपयोग न हो। कोर्ट ने सभी राज्यों को राज्य स्तरीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र स्थापित करने को भी कहा है।
कोर्ट ने केंद्र को गृह मंत्रालय, दूरसंचार और वित्त मंत्रालय सहित विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के विचार अदालत के समक्ष रखने को भी कहा है, ताकि साइबर अपराधों के खिलाफ कदम उठाने में सहायता मिल सके। त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और उनकी पुलिस एजेंसियां, सीबीआई के साथ मिलकर नागरिकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले बैंक खातों को फ्रीज करने के लिए स्वतंत्र हैं।
डिजिटल अरेस्ट, साइबर धोखाधड़ी की उन घटनाओं को कहते हैं जिनमें सारबर अपराधी जांच एजेंसियों और पुलिस के अधिकारियों का रूप धारण करके वीडियो या फोन कॉल के जरिए पीडि़तों से संपर्क करते हैं और उन पर मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध पार्सल जैसे अपराधों का झूठा आरोप लगाते हैं। आरोपी पीडि़त को डिजिटल अरेस्ट में होने का दावा करते हैं, उनसे बातचीत पर रोक लगाते हैं और तुरंत कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर मोटी रकम ऐंठ लेते हैं।
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