नईदिल्ली,02 दिसंबर (आरएनएस)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारत की ओर से मई में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अपनी सेना और वायुसेना का जवाबी कार्रवाई में इस्तेमाल किया था, लेकिन उसकी नौसेना पूरी तरह से कार्रवाई से बाहर रही थी। अब भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने बताया कि उस दौरान नौसेना ने आक्रामक रुख के माध्यम से पाकिस्तानी नौसेना अपने बंदरगाहों के करीब रहने के लिए मजबूर हुई थी।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आक्रामक रुख और युद्धक विमानवाहक समूह की तैनाती की तत्काल कार्रवाई ने पाकिस्तानी नौसेना को अपने बंदरगाहों या मकरान तट के पास रहने के लिए मजबूर कर दिया। भारतीय नौसेना प्रमुख ने यह भी दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और वास्तव में समाप्त नहीं हुआ है। पाकिस्तान की किसी भी नापाक हरकत का जवाब देने के लिए देश की तीनों सेनाएं हमेशा तैयार खड़ी है।
इधर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएनए) में 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर नागरिक-सैन्य एकीकरण का एक उल्लेखनीय उदाहरण है, जहां प्रशासनिक मशीनरी ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने और जनता का विश्वास बनाने के लिए सशस्त्र बलों के साथ निर्बाध रूप से काम किया। उन्होंने युवा सिविल सेवकों से राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को समझने का भी आह्वान किया।
राजनाथ ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बलों ने संतुलित और बिना किसी उकसावे वाली प्रतिक्रिया के साथ पाकिस्तान और पीओके में आतंकी शिविरों को नष्ट कर दिया, लेकिन यह पड़ोसी देश का दुर्व्यवहार था, जिसने सीमा पर स्थिति को सामान्य नहीं होने दिया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए गए कार्य की सराहना की, क्योंकि उन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी संप्रेषित की और देश भर में मॉक ड्रिल का सफल संचालन सुनिश्चित किया।
बता दें कि अप्रैल में पहलगाम में आतंकी हमला होने के बाद भारत ने 7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर चलाते हुए पाकिस्तान और पीओके में संचालित 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे। उसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर जवाबी हमला किया था, लेकिन भारतीय सेना ने उसके सभी हमलों को नाकाम कर दिया। उसके बाद दोनों देश संघर्ष विराम पर सहमत हो गए थे।
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