नईदिल्ली,02 दिसंबर (आरएनएस)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी ) के प्रमुख संस्थानों में प्लेसमेंट अभियान शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार इसमें 20 से अधिक कंपनियां भाग नहीं ले सकेंगी। संस्थान ने इन कंपनियों को प्रतिबंधित किया है। दरअसल, इन कंपनियों ने पिछले शैक्षणिक वर्ष में जिन छात्रों को नौकरी के प्रस्ताव दिए थे, उनको अंतिम समय में रद्द कर दिया है, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। अधिकारियों ने बताया कि कंपनियों के इस व्यवहार का असर छात्रों के प्रदर्शन पर पड़ता है।
सूत्रों ने बताया कि कई आईआईटी में जिन छात्रों को किसी कंपनी से नौकरी का प्रस्ताव मिल जाता है, उन्हें आगे अन्य कंपनी के साक्षात्कार में बैठने की अनुमति नहीं होती है। ऐसे में अगर छात्रों का अंतिम समय में प्रस्ताव रद्द होता है, तो इससे छात्रों पर नकारात्मक असर पड़ता है और उनके करियर भी खतरे में होता है। इसलिए आईआईटी संस्थानों ने सर्वसम्मति से कंपनियों को मौजूदा प्लेसमेंट चक्र से प्रतिबंधित करने का फैसला किया है।
प्लेसमेंट प्रक्रिया में शामिल एक आईआईटी प्रोफेसर ने बताया कि हाल में 15 आईआईटी के प्लेसमेंट समन्वयकों ने कथित कंपनियों की जांच की थी, जिसमें कई खुलासे हुए। पता चला कि पिछले रिकॉर्ड में इन कंपनियों का ऑफर रद्द करने का इतिहास रहा है और छह-सात आईआईटी ने तो उन्हें पहले ही भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया था। कंपनियों ने कई आईआईटी में अपने ऑफर रद्द कर दिए थे। इनमें से कुछ डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर आधारित कंपनियां हैं।
आईआईटी बॉम्बे के 2025 बैच के एक छात्र ने बताया कि एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ने उसे 30 लाख रुपये का ऑफर मिला था, लेकिन ज्वाइन करने से 2 दिन पहले ही उसे वापस ले लिया गया। प्लेसमेंट प्रक्रिया के प्रोफेसर का कहना है कि इस साल आईआईटी संस्थान, विकसित भारत पहल के तहत केंद्र द्वारा समर्थित ज़्यादा स्टार्टअप्स को सक्रिय रूप से शामिल कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि संस्थान अन्य कंपनियों की भी जांच करेगा।
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