नई दिल्ली,02 दिसंबर (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (पोक्सो एक्ट) के तहत दर्ज सेक्सुअल हैरेसमेंट केस में ट्रायल पर रोक लगा दी है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने येदियुरप्पा की उस अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के केस रद्द करने से इनकार को चुनौती दी गई थी.
केस की सुनवाई करते हुए सीजेआई कांत ने कहा कि नोटिस जारी की जा रही है. इस बीच, ट्रायल की कार्रवाई नहीं होगी. वहीं, बेंच ने कहा कि नोटिस मुख्य रूप से मामले को वापस हाई कोर्ट भेजने पर विचार करने के लिए जारी की गई है. येदियुरप्पा की तरफ से सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि हाई कोर्ट ने जरूरी सबूतों को नजरअंदाज़ किया है और उन बयानों पर विचार करने में नाकाम रहा जिनसे पता चलता है कि कथित घटना के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ. लूथरा ने आगे कहा कि कुछ बयान ऐसे हैं जिन्हें प्रॉसिक्यूशन दबाता है. हाई कोर्ट ने तथ्यों को नजरअंदाज किया. वह राज्य के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं.
इस पर सीजेआई ने उनसे पूछा कि आप हाई कोर्ट को मिनी ट्रायल करने के लिए कैसे मजबूर कर सकते हैं? प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (पोक्सो) एक्ट के तहत स्नढ्ढक्र 14 मार्च, 2024 को एक महिला की शिकायत पर हुई थी, जिसकी अब मौत हो चुकी है. महिला ने आरोप लगाया था कि येदियुरप्पा ने मदद मांगने के लिए अपने घर आने पर उसकी 17 साल की बेटी के साथ छेड़छाड़ की. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने पैसे का लालच देकर घटना को दबाने की कोशिश भी की थी.
उसकी शिकायत के आधार पर ही पुलिस ने यौन उत्पीडऩ और उत्पीडऩ के अपराधों से संबंधित पोक्सो अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत स्नढ्ढक्र दर्ज की थी. इसके बाद, 4 जुलाई 2024 को, एक ट्रायल कोर्ट ने न केवल येदियुरप्पा के खिलाफ, बल्कि तीन अन्य लोगों के खिलाफ भी सबूत नष्ट करने और मामले को दबाने की कोशिशों के आरोप में अपराधों का संज्ञान लिया. इसके बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस ऑर्डर को क्रिप्टिक बताते हुए रद्द कर दिया और ट्रायल कोर्ट को इस पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया.
इसके बाद, 28 फरवरी को फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने एक नया ऑर्डर जारी किया और येदियुरप्पा और दूसरे आरोपियों को 15 मार्च को पेश होने के लिए समन भेजा. येदियुरप्पा ने 28 फरवरी के आदेश और शिकायत को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि आरोप राजनीति से प्रेरित और एक जैसे नहीं हैं. हालांकि, हाई कोर्ट ने पिछले महीने केस रद्द करने से मना कर दिया, जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
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