नई दिल्ली,02 दिसंबर (आरएनएस)। देश की राजधानी दिल्ली में आग की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही है. आए दिन हो रही आग के हादसों में जहां लोगो की मौत हो रही है तो वहीं हजारों-लाखों का सामान भी जलकर खाक हो रहा है. ताजा मामला दिल्ली के साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के वसंत विहार थाना क्षेत्र के कुली कैंप इलाके का है. जहां सोमवार तड़के एक रैन बसेरे में लगी भीषण आग से अफरा-तफरी मचा गई.
देर रात करीब साढ़े तीन बजे अधिकांश लोग गहरी नींद में थे, तभी अचानक शेल्टर होम से घना धुआं और तेज लपटें उठने लगीं. आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर सो रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला. कुछ लोग जान बचाते हुए बाहर भागे. घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों ने जानकारी दमकल विभाग और पुलिस को दी.
डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि करीब 3:15 बजे वसंत विहार थाना पुलिस को कुली कैंप स्थित रैन बसेरे में आग लगने की सूचना मिली. जानकारी मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची तो पाया कि एसपीवाईएम एनजीओ द्वारा संचालित शेल्टर होम में आग लगी हुई थी. पुलिस के पहुंचने के कुछ ही मिनट बाद दमकल विभाग की टीमें भी मौके पर पहुंची.
अधिकारियों ने बताया कि पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि दो लोग आग की चपेट में आ गए.
दिल्ली फायर सर्विस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आग लगने की सूचना रात तीन बजकर 28 मिनट पर कंट्रोल रूम में मिली थी. सूचना मिलते ही दमकल की चार गाडिय़ों को तत्काल रवाना किया गया. टीम ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक दो लोग गंभीर रूप से झुलस चुके थे. दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. मृतकों की पहचान अर्जुन (18) और विकास (42) के रूप में हुई है. दोनों रात गुजारने के लिए रैन बसेरे में ठहरे हुए थे.
वसंत विहार थाना पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस अब शेल्टर होम के प्रबंधन, वहां तैनात स्टाफ, रहने वालों के बयान और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर रही है. अधिकारियों ने कहा है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय हो सकेगी. यह हादसा एक बार फिर दिल्ली में शेल्टर होम्स की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. मौके पर मौजूद लोग बताते हैं कि अगर आग लगने के कुछ मिनट पहले किसी ने लपटें न देखी होती तो मृतका की संख्या और बढ़ सकती थी.
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