नई दिल्ली,27 मई(आरएनएस)। केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) (संशोधन) अधिनियम, 2026 के खिलाफ विभिन्न हाई कोर्ट में लंबित सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया.
सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली अलग-अलग याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा था. आज सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने इस मामले का जिक्र किया. मेहता ने बेंच से शुक्रवार को ट्रांसफर याचिकाओं की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया.
उन्होंने कहा, ”अगर याचिकाएं शुक्रवार को सूचीबद्ध की जाती हैं और नोटिस जारी किया जाता है, तो हम हाई कोर्ट से अपनी कार्यवाही स्थगित करने का अनुरोध कर सकते हैं.ÓÓ मेहता ने कहा, हमने ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम के खिलाफ चुनौतियों को इस अदालत में लाने के लिए स्थानांतरण याचिका दायर की हैज्
मेहता ने कहा कि अगर याचिका शुक्रवार को लिस्ट होती हैं और नोटिस जारी किया जाता है, तो सरकार हाई कोर्ट से अपनी कार्रवाई टालने की अनुरोध कर सकती है.
उन्होंने कहा कि चूंकि कई हाई कोर्ट इस मामले पर अभी विचार कर रहे हैं, इसलिए फेडरल कानून की वैधता पर अलग-अलग राय और अलग-अलग न्यायिक फैसलों का काफी खतरा है. लेकिन, सीजेआई मामले को तुरंत सुनवाई के लिए लिस्ट करने में हिचकिचा रहे थे. सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अक्सर राज्य की अदालतों की बुनियादी कानूनी दलीलों से फ़ायदा होता है.
सीजेआई ने कहा, कभी-कभी हमें हाई कोर्ट के नजरिए का भी फायदा मिल सकता है. मेहता ने बेंच से मामले को तत्काल सुनवाई के लिए लिस्ट करने का अनुरोध किया. मेहता की बातें सुनने के बाद, सीजेआई ने कहा कि वह देखेंगे.
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) (संशोधन) एक्ट, 2026, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और एलजीबीटीक्यू + समुदाय के सदस्यों की कड़ी कानूनी जांच के दायरे में आ गया है. झगड़े की मुख्य वजह जेंडर की आत्म-पहचान की अवधारण को हटाना है, यह एक ऐसा अधिकार है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पहले अपने ऐतिहासिक नालसा फैसले में सही ठहराया था.
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