नई दिल्ली,03 दिसंबर (आरएनएस)। सरकार के 9 दिसंबर को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस के लिए सहमत होने के बाद इंडिया ब्लॉक ने जीत का दावा किया. देश भर के राज्यों में वोटर लिस्ट का विवादित विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर, चुनाव सुधारों पर बहस का हिस्सा होगा, जिसकी मांग एकजुट विपक्ष 1 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद से कर रहा था.
एसआईआर को लेकर विवाद जून में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ था. पिछले मानसून सेशन के दौरान एसआईआर का मुद्दा विपक्ष और सरकार के बीच झगड़े का बड़ा मुद्दा बन गया था और इसकी वजह से कई काम के दिन बर्बाद हो गए थे. विपक्ष ने एसआईआर को दोषी ठहराया था, जिसकी वजह से बिहार में इंडिया ब्लॉक की हार के लिए वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटा दिए गए थे. साथ ही, विपक्ष ने बाद में 9 राज्यों और 3 यूटी में इस प्रोसेस को बढ़ाने का भी विरोध किया था.
कांग्रेस के अंदर के लोगों ने बताया कि 1 दिसंबर की सुबह इंडिया ब्लॉक स्ट्रेटेजी मीटिंग के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साफ कर दिया था कि एसआईआर लोकतंत्र से जुड़ा है और इसलिए इस मुद्दे पर बहस नहीं हो सकती. विपक्ष ने पिछले कुछ दिनों में संसद भवन के बाहर इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी किया था.
एनडीए में समझदारी आने के बाद चल रहे सेशन में दो दिन गंवाने के बाद सरकार आखिरकार इस मुद्दे पर बहस के लिए मान गई. 14 दिसंबर को कांग्रेस एसआईआर मुद्दे पर दिल्ली में एक बड़ी रैली करने की योजना बना रही है और उसने पार्टी की यूथ विंग से राज्यों में विरोध प्रदर्शन करने को कहा है.
लोकसभा में कांग्रेस सचेतक मणिकम टैगोर ने कहा, यह विपक्ष की जीत है जो एसआईआर पर बहस की मांग को लेकर एकजुट था, लेकिन सरकार तैयार नहीं थी. अब वे 9 दिसंबर को चुनाव सुधारों पर बहस के लिए सहमत हो गए हैं. इस वजह से एक पूरा मानसून सेशन बर्बाद हो गया और हमने विंटर सेशन के दो दिन गंवा दिए. डेमोक्रेसी ध्यान भटकाने का मैदान नहीं है, यह जवाबदेही मांगता है.
उन्होंने कहा, हम एसआईआर पर चल रहे काम के दबाव और राज्यों से गड़बडिय़ों की रिपोर्ट आने के बावजूद इस काम को जल्दबाजी में पूरा करने के तरीके से जुड़ी कई बीएलओ की मौतों को लेकर चिंतित हैं. एसआईआर का इस्तेमाल ओबीसी के वोट हटाने के लिए किया जा रहा है.
अगस्त में राहुल गांधी ने आरजेपी नेता तेजस्वी यादव के साथ एसआईआर के मुद्दे को उठाने के लिए पूरे बिहार में यात्रा की थी. विपक्ष एसआईआर पर बहस के लिए दबाव बना रहा था. यह अच्छा है कि बहस होगी और दोनों पक्षों को सदन में तथ्य रखने का मौका मिलेगा. इस काम में कई मुद्दे हैं और सही तस्वीर सामने आनी चाहिए.
देश में कोई डेमोक्रेसी नहीं है क्योंकि सरकार अपना एजेंडा आगे बढ़ा रही है. बिहार में एसआईआर मायने रखता था और असेंबली पोल का नतीजा अजीब था. इसे कभी भी एनडीए के पक्ष में एकतरफा नहीं होना चाहिए था. जमीनी हकीकत अलग थी. इसके अलावा, बिहार के कई बीजेपी विधायक को लगभग एक जैसे वोट मिले हैं, जिससे शक होता है आरजेडी के राज्यसभा सांसद एडी सिंह ने बताया.
बिहार के बाद एसआईआर छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल और 3 केंद्र शासित प्रदेश यानी अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में चल रहा है. डीएमके इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई है और दक्षिणी राज्य में इस काम पर नजर रख रही है.
डीएमके के लोकसभा सांसद डीएम कथिर आनंद ने बताया, एसआईआर मुद्दे पर विपक्ष एकजुट है. पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी ने एसआईआर का विरोध करते हुए कहा था कि बीजेपी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले बांग्लादेश से कथित घुसपैठियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इसे आगे बढ़ा रही है.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, एसआईआर एक बहुत ही पेचीदा मुद्दा है और पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में जिस तरह से इसे लागू किया जा रहा है, उसमें कई कमियां हैं. बीजेपी बंगाल में राजनीतिक मकसद से इसे आगे बढ़ा रही है, लेकिन हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे. हमने चुनाव आयोग के सामने अपनी चिंताओं को विस्तार से रखा था, लेकिन हमें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. यह अच्छा है कि विपक्ष का दबाव काम आया और वे बहस के लिए मान गए. सरकार की जिद के कारण मॉनसून सेशन नहीं हो पाया. देखते हैं वे क्या कहते हैं.
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