नई दिल्ली,04 दिसंबर (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारी शुरू हो चुकी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल को लेकर रणनीति बनाने की शुरुआत कर दी है. शाह अब हर महीने बंगाल जाएंगे और वहां ज्यादा से ज्यादा समय बिताएंगे. अमित शाह के इन दौरों का फोकस संगठन को मजबूत करना, सहयोगी दलों के साथ समन्वय और कार्यकर्ताओं में जोश भरना होगा.
यदि देखा जाए तो पश्चिम बंगाल हमेशा से अमित शाह के लिए नाक की लड़ाई रही है. पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 77 सीटें मिली थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को झटका लगा. अब 2026 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी और पार्टी कम से कम 200 सीटों का लक्ष्य लेकर मैदान में जा रही है. सूत्रों की मानें तो अमित शाह की रणनीति बिहार मॉडल पर आधारित है – जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं को परिश्रम की पराकाष्ठा के लिए प्रेरित किया था.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर लगातार हमला. पार्टी ऑपरेशन बंगाल के तहत महिलाओं के सम्मान को प्रमुख मुद्दा बनाएगी.
बूथ स्तर पर पन्ना प्रमुख और शिक्षा केंद्रों को सक्रिय करना. अमित शाह खुद जोन-वाइज बैठकें करेंगे और कमजोर इलाकों में जहां कम, वहां हम का मंत्र देंगे.
सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे पर चर्चा, हालांकि बंगाल में बीजेपी अकेले लड़ेगी. शाह राज्य के स्थानीय नेताओं जैसे सुकांत मजूमदार और शुभेंदु अधिकारी के साथ मिलकर टीएमसी के घर वापसी करने वाले नेताओं को एकजुट करेंगे.
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, अमित शाह बंगाल को बिहार की तरह ही फतह करेंगे. ममता दीदी का किला अब लडख़ड़ा रहा है. शाह का दौरा कार्यकर्ताओं के लिए जीत का मंत्र लेकर आएगा.
पश्चिम बंगाल के अलीपुर से भाजपा सांसद मनोज तिग्गा ने कहा कि मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बौखला गई हैं और वो अपना वोट बैंक खोने को लेकर बौखला गई हैं. उन्होंने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए इस बार बंगाल भाजपा की सरकार बनेगी.
यदि देखा जाए तो शाह का यह अभियान केवल बंगाल तक सीमित नहीं है. वह पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी हर महीने दो दिन बिताएंगे. इन राज्यों में सहयोगी दलों के साथ संयुक्त रणनीति बनाई जाएगी. बिहार की जीत से उत्साहित अमित शाह ने हाल ही में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर डिनर मीटिंग में नेताओं को निर्देश दिए थे, कार्यकर्ता मोड में रहें. किसी की भी ड्यूटी कहीं भी लग सकती है. घमंड न करें, परिश्रम करें.
टीएमसी अमित शाह के दौरे को राजनीतिक स्टंट बताते हुए खारिज कर रही है. टीएमसी प्रवक्ता ने कहा, ममता दीदी बंगाल की बेटी हैं. अमित शाह की चालाकियां यहां काम नहीं आएंगी. बंगाल की जनता टीएमसी के साथ है.
हालांकि, हाल के दिनों में टीएमसी से कई नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की खबरें आ रही हैं, जो शाह की कूटनीति का नतीजा माना जा रहा है. बीजेपी का यह आक्रामक अभियान 2026 के चुनावों को रोमांचक बनाने वाला है. क्या अमित शाह बंगाल में चाणक्य साबित होंगे? आने वाले महीनों में इसका जवाब मिलेगा.
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