लंदन 06 Dec, : भारत के लगातार कूटनीतिक दबाव का असर अब ब्रिटेन में साफ दिखने लगा है। ब्रिटिश सरकार ने खालिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाते हुए आतंकवादी संगठन बब्बर अकाली लहर और उससे जुड़े व्यक्ति गुरप्रीत सिंह रेहल पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह कार्रवाई 4 दिसंबर को की गई, जिसका मकसद ब्रिटेन की वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग कर रहे चरमपंथियों की कमर तोड़ना है। इसे भारत और ब्रिटेन के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग में एक नई और मजबूत शुरुआत माना जा रहा है, जिससे प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के नेटवर्क को गहरा झटका लगेगा।
ब्रिटेन सरकार ने काउंटर-टेररिज्म (सैंक्शंस) रेगुलेशंस 2019 के तहत यह बड़ी कार्रवाई की है। इसके तहत गुरप्रीत सिंह रेहल और बब्बर अकाली लहर की ब्रिटेन स्थित सभी संपत्तियों, फंड्स और आर्थिक संसाधनों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है। इतना ही नहीं, रेहल से जुड़ी कंपनियों ‘सेविंग पंजाब सीआईसी’, ‘वाइटहॉक कंसल्टेशंस लिमिटेड’ और ‘लोहा डिजाइन्स’ पर भी प्रतिबंध लागू किए गए हैं। अब कोई भी ब्रिटिश नागरिक या संस्था इनके साथ किसी भी तरह का वित्तीय लेन-देन नहीं कर सकेगी। सरकार ने रेहल को किसी भी कंपनी का निदेशक बनने या प्रबंधन में शामिल होने से भी रोक दिया है। इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों पर सात साल तक की जेल या 10 लाख पाउंड तक के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। यह पहली बार है जब ब्रिटेन ने अपने घरेलू आतंकवाद विरोधी कानून का इस्तेमाल विशेष रूप से खालिस्तानी मिलिटेंट ग्रुप्स की फंडिंग को रोकने के लिए किया है।
गुरप्रीत सिंह रेहल और उसके संगठन पर गंभीर आरोप हैं कि वे भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त बब्बर खालसा इंटरनेशनल के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे थे। ब्रिटिश सरकार की जांच में पाया गया कि ये तत्व आतंकी समूहों के लिए भर्ती अभियान चलाने, फंड इकट्ठा करने, हथियारों और सैन्य सामग्री की खरीद में सहायता करने जैसी गतिविधियों में शामिल थे। बब्बर अकाली लहर को बब्बर खालसा का ही एक सहयोगी संगठन माना जाता है, जो खालिस्तान आंदोलन के नाम पर हिंसा और नफरत फैलाने के लिए कुख्यात है।
इस कार्रवाई पर ब्रिटेन की आर्थिक सचिव लूसी रिग्बी केसी एमपी ने सख्त संदेश देते हुए कहा कि उनकी सरकार आतंकवादियों द्वारा ब्रिटेन की वित्तीय प्रणाली का शोषण बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने साफ किया कि यह कदम उन शांतिपूर्ण समुदायों के समर्थन में उठाया गया है जो हिंसा के खिलाफ हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, ब्रिटेन का यह कदम खालिस्तानी चरमपंथियों के वैश्विक फंडिंग नेटवर्क पर एक करारी चोट है। भारत लंबे समय से ब्रिटेन से अपनी धरती पर पनप रहे खालिस्तानी नेटवर्क पर कार्रवाई की मांग कर रहा था और यह फैसला दोनों देशों के सुरक्षा सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

