अंतिम चरण में चल रहा काम, माघ मेले में यात्रियों को मिलेगी सुविधा
प्रयागराज 8 दिसंबर (आरएनएस )। मेरठ से प्रयागराज तक बन रहे देश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे छह लेन चौड़ा होगा, जिसमें आवश्यकता पडऩे पर आठ लेन तक विस्तार की भी संभावना है। परियोजना का कुल खर्च लगभग 5626 करोड़ रुपये है और इसका निर्माण कार्य 2 नवंबर 2022 को शुरू हुआ था।
गंगा एक्सप्रेसवे का कार्य चार चरणों में पूरा किया जा रहा है, जिनमें से चौथा चरण उन्नाव के आंशिक इलाके से शुरू होकर रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज के सोरांव स्थित जूड़ापुर दांदू तक पहुंच चुका है। चौथे चरण का निर्माण पूरा हो चुका है, वहीं तीसरे चरण का केवल 10 से 15 प्रतिशत काम ही शेष बचा है।
शासन ने इस परियोजना को 31 दिसंबर 2025 तक पूरा करने की कड़ी समय सीमा दी है, ताकि इसे जल्द से जल्द आम जनता के लिए खोल दिया जाए। यूपीइडा के अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर के अंत तक गंगा एक्सप्रेसवे की सभी निर्माण गतिविधियां पूरी हो जाएंगी।
यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज के सोरांव तहसील के 20 गांवों से होकर गुजरेगा। इनमें पश्चिमनारा, पूरबनारा, जलियासई, सराय मदन सिंह, गिरधरपुर गोडवा, परसूपुर नारी, मालापुर, फतेहपुर तालुका सहावपुर, लखनपुर करन, खेमकरनपुर जैसे गांव शामिल हैं। कुल मिलाकर यह मार्ग लगभग 15 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैला है, जो इन गांवों को मुख्य सड़कों से जोडऩे में भी मदद करेगा। माघ मेले के दौरान इस एक्सप्रेसवे के खुलने से भारी भीड़ के बावजूद यातायात सुगमता से चलेगा और यात्रियों को सुविधा मिलेगी। एक्सप्रेसवे पर वाहन तेज गति से चल सकेंगे, जिससे समय की बचत होगी और सुरक्षा में सुधार होगा। सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी, बल्कि प्रयागराज जैसे प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों तक पहुंच को भी सहज बनाएगी।
एक्सप्रेसवे के खुलने से उत्तर प्रदेश के विकास में एक नया अध्याय जुडऩे की उम्मीद है। माघ मेले के अवसर पर गंगा एक्सप्रेसवे से यात्रियों को लाभ मिलेगा और प्रदेश के परिवहन तंत्र को मजबूती मिलेगी। इस परियोजना के पूरे होने से पूरे क्षेत्र में विकास की गति तेज होगी और लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा।
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