नई दिल्ली , 09 दिसंबर (आरएनएस) l 2025 के अंत तक पहुँचते-पहुँचते भारत में एक स्पष्ट और सख्ती से लागू होने वाले क्रिप्टो कर ढांचे की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। देश की घरेलू क्रिप्टो इंडस्ट्री लंबे समय से चेतावनी देती रही है कि कई विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म भारत में बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं, लेकिन टैक्स और अन्य अनुपालन नियमों का पालन नहीं करते। इसी मुद्दे को कल लोकसभा में एक बार फिर उजागर किया गया, जब वित्त राज्य मंत्री ने अपने लिखित जवाब में कहा कि सरकार ने “यह पाया है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं को सेवा देने वाले कुछ ऑफशोर क्रिप्टो एक्सचेंज आयकर अधिनियम के तहत तय TDS नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।यह सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं है। इससे भारतीय उपयोगकर्ताओं पर भविष्य में टैक्स का बोझ बढ़ सकता है, घरेलू एक्सचेंजों की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ती है और देश की राजस्व सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ता है। संसद प्रश्न संख्या 1194 के जवाब में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जहां भी आय भारत में कर योग्य है, वहाँ टीडीसी नियम सभी लेनदेन पर लागू होते हैं, चाहे वे लेनदेन किसी भी विदेशी प्लेटफॉर्म पर क्यों न किए गए हों। यानी गैर-अनुपालन न केवल अवैध है, बल्कि भारत के वित्तीय कानूनों का साफ उल्लंघन भी है। भारत की क्रिप्टो इंडस्ट्री लंबे समय से उपभोक्ता सुरक्षा और बराबरी वाली नीति की मांग करती रही है। अब जब सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि ऑफशोर एक्सचेंज नियमों का पालन नहीं कर रहे, तो तुरंत और प्रभावी नियामकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता और भी स्पष्ट हो गई है। अब सवाल यह नहीं है कि भारत को कार्रवाई करनी चाहिए या नहीं—सवाल यह है कि यह कार्रवाई कितनी जल्दी की जा सकती है, ताकि खतरे और न बढ़ें।
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