हाईकोर्ट के आदेश पर तीन शीर्ष संस्थानों के ज्वाइंट मेडिकल बोर्ड से होगी दोबारा जांच, जो वास्तविक दिव्यांगता पर लेगा फैसला
नई दिल्ली, 09 दिसम्बर (आरएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने केंद्रीय व राज्य स्तरीय भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला यूपीपीसीएस-2019 और यूपीएससी सीएसई-2024 में पीडब्ल्यूबीडी – पर्सन्स विथ बेंचमार्क डिसएबिलिटी कोटे से चयनित शुभम अग्रवाल से जुड़ा है। आरोप है कि उम्मीदवार ने छेड़छाड़ या फर्जीवाड़े से तैयार किए गए डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट्स के आधार पर दिव्यांग कोटे का लाभ उठाया, जबकि शीर्ष राष्ट्रीय अस्पतालों की मेडिकल रिपोर्ट उसे बार-बार अयोग्य बताती रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद यह मामला केंद्र, राज्य और विजिलेंस एजेंसियों तक पहुंच चुका है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने यूपीएससी सीएसई-2024 के पीडब्ल्यूबीडी कोटे में चयन पाने वाले शुभम अग्रवाल की दिव्यांगता को लेकर सामने आई भारी विसंगतियों पर बड़ा आदेश दिया है। बेंच ने जीटीबी हॉस्पिटल, सीजीएचएस और दीन दयाल अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों का ज्वाइंट मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया है, जो उम्मीदवार की वास्तविक दिव्यांगता पर अंतिम फैसला करेगा।शुभम अग्रवाल ने कैट – सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के उस दिशा-निर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें CAT ने अपीलेट बोर्ड की रिपोर्ट को देखते हुए उम्मीदवार को ट्रेनिंग शुरू करने की सशर्त अनुमति दी, लेकिन साथ ही तीसरी मेडिकल एग्ज़ामिनेशन का निर्देश भी दिया।हाईकोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी विसंगतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

