रायपुर, 10 दिसम्बर (आरएनएस)। महिलाओं की सुरक्षा एवं अधिकारों को सुदृढ़ करने हेतु महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडऩ अधिनियम 2013 पर आधारित प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन आज रेडक्रॉस सभाकक्ष, कलेक्टोरेट परिसर, रायपुर में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डिप्टी कलेक्टर तुलसी राठौर ने की। कार्यशाला में स्थानीय शिकायत समिति के अध्यक्ष एवं विभिन्न शासकीय/अशासकीय विभागों में गठित आंतरिक शिकायत समितियों के सदस्य उपस्थित रहे। सबसे पहले जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग शैल ठाकुर ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने सभी विभागों में गठित आंतरिक शिकायत समितियों को सक्रिय रूप से कार्य करने हेतु प्रोत्साहित किया तथा अधिनियम की मुख्य प्रावधानों पर संक्षिप्त चर्चा की। मनोचिकित्सक श्रीमती राशि अग्रवाल ने कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडऩ के मनोवैज्ञानिक प्रभावों जैसे चिंता, अवसाद, आत्मसम्मान में कमी, कार्य प्रदर्शन में गिरावट, सुरक्षा संबंधित भ्रम आदि के बारे में अवगत कराया। उन्होंने पीडि़तों को सहज वातावरण प्रदान करने एवं समिति द्वारा संवेदनशील रवैया अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। परामर्शदाता चंद्रिका कौशल ने बताया कि पीडि़त महिलाएँ 21 दिवस के भीतर अपनी शिकायत आंतरिक या स्थानीय समिति में दर्ज करा सकती हैं। समिति द्वारा प्राप्त प्रकरण का निराकरण 90 दिवस के भीतर किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने कार्यस्थल पर परिवार जैसा सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के महत्व पर भी चर्चा की। विधि विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत कुमार ने अधिनियम की कानूनी पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए जानकारी दी कि केंद्र सरकार द्वारा यौन उत्पीडऩ के मामलों की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति गठित की गई थी। समिति की सिफारिशों एवं विशाखा दिशा-निर्देशों के आधार पर वर्ष 2013 में यह अधिनियम बनाया गया। सहायक संचालक अतुल दाण्डेकर ने ”शी-बॉक्सÓÓ ऑनलाइन पोर्टल के उपयोग और महत्त्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शासकीय एवं अद्र्धशासकीय विभागों को पोर्टल पर ऑनबोर्ड किया जा रहा है ताकि पीडि़त महिलाएँ आसानी से अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकें। अंत में स्थानीय शिकायत समिति की अध्यक्ष संगीता मिश्रा द्वारा आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।
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