कोंडागांव,14 दिसम्बर (आरएनएस)। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत जिले में गठित स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को लखपति दीदीबनाने के उद्देश्य से सुनियोजित कार्ययोजना पर अमल किया जा रहा है। समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना द्वारा दिए गए निर्देशों के तारतम्य में, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अविनाश भोई के मार्गदर्शन में यह अभियान संचालित किया जा रहा है।इस योजना के तहत फार्म एवं नॉन-फार्म आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उत्पादक समूहों के संगठन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं कैडर का चयन कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। जिले की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि, वनोपज आधारित गतिविधियों के साथ-साथ नॉन-फार्म सेक्टर में आजीविका के अवसर विकसित किए जा रहे हैं, ताकि दीदियों की आय में सतत वृद्धि हो सके।इसी क्रम में जिले में कुल 185 उत्पादक समूहों का गठन किया गया है। प्रत्येक उत्पादक समूह 30 से 35 परिवारों को मिलाकर बनाया गया है, जिनका मुख्य उद्देश्य सामूहिक रूप से अपनी उपज का संग्रहण, क्रय-विक्रय कर बेहतर लाभ अर्जित करना है। इन उत्पादक समूहों के अध्यक्ष एवं सचिवों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।उत्पादक समूहों की आय बढ़ाने के लिए मिशन के माध्यम से जिले में दो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों (एफपीओ) का गठन किया गया है। उड़ान महिला कृषक प्रोड्यूसर कंपनी, कोंडागांव द्वारा कोंडागांव, माकड़ी एवं फरसगांव विकासखंडों के महिला किसानों के साथ कार्य किया जा रहा है। वहीं, बड़ेराजपुर में 10 केएफपीओ के अंतर्गत मांझीनगढ़ फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी का गठन किया गया है, जो केशकाल एवं बड़ेराजपुर विकासखंडों में महिला किसानों को लाभान्वित कर रही है। इन कंपनियों के सीईओ के माध्यम से उत्पादक समूहों के अध्यक्ष एवं सचिवों को प्रशिक्षण दिलाया गया, ताकि आपसी समन्वय सुदृढ़ हो और कंपनियों के माध्यम से दीदियों को समय पर उचित मूल्य एवं सुविधाएं मिल सकें।बिहान के दीदियों को समय पर जानकारी एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मिशन संचालक द्वारा निर्देशित किया गया है कि जिले में गठित संकुल स्तरीय संगठनों को आजीविका सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। जिले के समूह के दीदियों द्वारा बनाये गये उत्पाद को भी आजीविका सुविधा केंद्र में भी रखा जाए जिससे सभी समूह की दीदियों को एक दुसरे के उत्पाद की जानकारी रहे और एक समूह दुसरे समूह की उत्पाद को बड़ी आसानी से खरीद बिक्री कर सकें। इस तरह से इन केंद्रों के माध्यम से कृषि, पशुपालन एवं नॉन-फार्म गतिविधियों से संबंधित सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी। जिले में कुल 20 संकुल स्तरीय संगठनों को आजीविका सेवा केंद्र के रूप में स्थापित किया जा रहा है, प्रत्येक विकासखंड में चार-चार संकुल स्तरीय संगठन बनाए गए हैं।कोंडागांव विकासखंड के चिपांवड संकुल स्तरीय संगठन सूर्या उदय महिला संकुल संगठन को कृषि विभाग द्वारा बीज लाइसेंस प्रदान कर सराहनीय पहल किया गया है। प्रयास किया जा रहा है कि शेष सभी संकुल स्तरीय संगठनों को भी शीघ्र बीज लाइसेंस प्राप्त हो, जिससे भविष्य में बीज एवं अन्य कृषि आदानों की सुविधा संगठन स्तर पर ही उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही सभी विभागों के साथ समन्वय कर आजीविका सेवा केंद्रों को बहुउद्देशीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी और लाभ ग्रामीणों तक आसानी से पहुंच सके।इसी उद्देश्य से जिला पंचायत सीईओ के समक्ष सभी विकासखंडों में विभागीय समन्वय (कन्वर्जेंस) बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें समूहों से जुड़े परिवारों को लखपति बनाने के लिए आवश्यक सुविधाओं, संसाधनों एवं योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला मिशन प्रबंधक विनय सिंह द्वारा सभी विभागों के साथ समन्वय कर लखपति दीदी अभियान को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, आजीविका गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता जिला कार्यक्रम प्रबंधक दुर्योधन मेंघ द्वारा आरएफ, सीआईएफ एवं बैंक लिंकेज के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।कलेक्टर के निर्देश एवं जिला सीईओ के मार्गदर्शन में बिहान की पूरी टीम एक अभियान के रूप में दीदियों को लखपति बनाने के लक्ष्य को लेकर कार्य कर रही है। सभी विभागों के सहयोग से योजनाओं का लाभ दिलाकर कम लागत में आजीविका गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि जिले की अधिक से अधिक दीदियां आत्मनिर्भर बनकर लखपति दीदी का सपना साकार कर सकें।
००००
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

