हाईकोर्ट ने दिखाई की सशर्त हरी झंडी
कोलकाता 14 दिसंबर (आरएनएस)। बंगाल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल तो उठते रहे हैं। वहीं मदरसा शिक्षक और कर्मचारी भी व्यवस्था पर सवाल दागते हुए रास्ते पर उतरने के लिए कवायद में हैं। ऐसे में जब इन्हें कोई रास्ता नहीं मिला तो पश्चिम बंगाल सरकार से मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त मदरसा शिक्षक और कर्मचारी हाईकोर्ट की शरण में गए। उक्त लोगों की माने तो वह लोग अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं। कारण वह लोग स्थायी नौकरी के साथ ही तनख्वाह बढ़ाने की मांग कर रहें है। यही कारण है कि वह लोग अपने कई सूत्री मांगों को लेकर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें धरना देने की इजाजत दे दी है। मदरसा शिक्षकों और कर्मचारियों की माने तो
उनलोगों ने पुलिस से साल्टलेक में धरना के लिए इजाजत मांगाा था। लेकिन, पुलिस ने उन्हें धरना देने की इजाजत नहीं दी।आखिरकर पश्चिम बंगाल गैर-सहायता प्राप्त मदरसा एकता मंच ने विरोध प्रदर्शन करने की इजाजत मांगने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस शुभ्रा घोष ने इनलोगों को 17 दिसंबर से अनिश्चित समय के लिए विरोध प्रदर्शन की इजाजत दे दी। हालांकि, कोर्ट ने आदेश दिया है कि विरोध प्रदर्शन साल्टलेक में नहीं, बल्कि कॉलेज स्क्वायर में बंकिम चटर्जी स्ट्रीट पर किया जा सकता है। हाई कोर्ट ने एक शर्त के तौर पर कहा है कि विरोध प्रदर्शन में 200 से ज्यादा लोग मौजूद नहीं होने चाहिए। कोई भी भड़काऊ शब्द नहीं बोला जाना चाहिए और नॉइज पॉल्यूशन नियमों के अनुसार माइक्रोफोन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यह भी पक्का किया जाना चाहिए कि सरकारी प्रॉपर्टी को कोई नुकसान न हो। मदरसा टीचर्स एंड एम्प्लॉइज एसोसिएशन के अनुमान के अनुसार, इन मदरसों से 2,500 से ज़्यादा शिक्षक और कर्मी जुड़े हुए हैं।
कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, इन मदरसों को पश्चिम बंगाल सरकार ने 2013 में मंज़ूरी दी थी। आठ साल के लंबे समय के बाद, 2021 में, साल्ट लेक सिटी सेंटर के सामने 46 दिन के धरने के बाद, राज्य सरकार ने इन सभी 235 एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के कर्मचारियों और टीचरों को कम से कम मानदेय दिया। यानी ग्रुप डी के लिए 5000, ग्रुप सी के लिए 5500, ग्रेजुएट टीचरों के लिए 6000 और पोस्ट-ग्रेजुएट के लिए 12000। जो अभी बहुत कम है, ऐसा पश्चिम बंगाल अन-एडेड मदरसा एकता मंच का दावा है। इसके अलावा, सब कुछ ग्रांट पर आधारित है।
मंच के मुताबिक, करीब 2500 टीचरों और एजुकेशन वर्करों को नौकरी की कोई गारंटी नहीं है। स्टूडेंट्स किताबों के अलावा सभी बेसिक अधिकारों से वंचित हैं। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दिए जाने वाले कपड़े, जूते और बैग के लिए बार-बार अप्लाई करने के बाद भी वे नहीं मिले हैं। इन पिछड़े एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के 40,000 से ज़्यादा स्टूडेंट्स, खासकर माइनॉरिटी के स्टूडेंट्स के साथ भेदभाव हो रहा है। दावा किया गया है कि बार-बार अप्लाई करने के बावजूद इन पिछड़े स्टूडेंट्स को केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाले मिड-डे मील से वंचित रखा गया है। कोई हल न निकलने पर, वेस्ट बंगाल रिकग्नाइज़ अन-एडेड मदरसा ओइक्या मंच ने आखिरकार एक लंबे समय का आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है। संगठन के लीडरशिप का मानना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो 235 एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन का खत्म होना तय है। इस बात की बहुत ज़्यादा संभावना है कि करीब 40,000 स्टूडेंट्स, खासकर पिछड़े माइनॉरिटी के स्टूडेंट्स, स्कूल छोड़ देंगे। इसीलिए वेस्ट बंगाल रिकग्नाइज़ अन-एडेड मदरसा ओइक्या मंच बुधवार, 17 दिसंबर को कलकत्ता हाई कोर्ट की इजाज़त से कॉलेज स्क्वायर में बंकिम चटर्जी स्ट्रीट पर अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन शुरू करने जा रहा है।
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