रुड़की,15 दिसंबर (आरएनएस)। सिविल अस्पताल रुड़की में पिछले चार सालों से दोनों ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट शोपीस बने हुए है। 50 लाख से अधिक के बजट से यह दोनों प्लांट लगाए गए थे, लेकिन इनका इस्तेमाल आज तक नहीं हो पाया है। दोनों प्लांटों पर ही ताला लटका है। हालांकि कभी-कभी ट्रायल के लिए इन प्लांट को चलाकर देख लिया जाता है। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन सिलेंडर की भारी किल्लत हुई थी। यहां तक की ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी भी जमकर हुई थी। ऑक्सीजन की इस किल्लत को देखते हुए केंद्र सरकार और एक कंपनी की ओर से दो ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाए थे। इन प्लांट की क्षमता 500-500 एलपीएम थी। हालांकि जब तक यह प्लांट तैयार हुए थे। तब कोरोना खत्म हो चुका था। अस्पताल में बनाए गए आईसीयू वार्ड और सामान्य वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए यह दोनों प्लांट लगाए गए थे। इनका ट्रायल भी करके देखा गया था, जो सफल रहा था। इन दोनों प्लांट को लगे हुए करीब चार साल हो चुके हैं, लेकिन इन प्लांट का इस्तेमाल एक भी दिन अस्पताल में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए नहीं हो पाया है। मरीजों को अब भी ऑक्सीजन, ऑक्सीजन सिलेंडर से ही दी जाती है। लाखों रुपये के बनाए गए यह दोनों ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट पर ताला लटका है। इनका कोई इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
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