नई दिल्ली ,22 दिसंबर । जापान की अर्थव्यवस्था के लिहाज से शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया गया है। बैंक ऑफ जापान ने बढ़ती महंगाई के दबाव को देखते हुए ब्याज दरों में तगड़ा इजाफा करते हुए इसे 0.75 फीसदी कर दिया है। केंद्रीय बैंक का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पिछले 30 सालों में यानी 1995 के बाद ब्याज दरों का सबसे ऊंचा स्तर है। गवर्नर काज़ुओ उएदा के नेतृत्व में मॉनिटरी बोर्ड द्वारा लिए गए इस फैसले ने जापान में दशकों से चले आ रहे ‘जीरो इंटरेस्ट रेटÓ या बेहद सस्ते कर्ज के दौर पर अब पूर्ण विराम लगा दिया है।
बाजार के जानकारों और आर्थिक विशेषज्ञों की नजर इस फैसले पर टिकी हुई थी और यह घोषणा उनकी उम्मीदों के अनुरूप ही रही है। एक्सपर्ट्स पहले से ही अनुमान लगा रहे थे कि शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों को 0.5 फीसदी से बढ़ाकर 0.75 फीसदी किया जा सकता है। बेंचमार्क दर में एक चौथाई फीसदी की इस बढ़ोतरी का सीधा मतलब है कि जापान में अब उधार लेने की लागत बढ़ जाएगी, जो वहां की अब तक की उदार मौद्रिक नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश की नई प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची महंगाई को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ताकाइची और गवर्नर उएदा के अपने-अपने पद संभालने के बाद यह पहली बार है जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गई है। जापान में अब तक अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए भारी मॉनेटरी सपोर्ट दिया जा रहा था, लेकिन बढ़ती मुद्रास्फीति ने बैंक को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। इस फैसले के दूरगामी परिणामों और बैंक की आगे की रणनीति के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए गवर्नर उएदा आज दोपहर बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे, जिस पर वैश्विक बाजारों की भी नजर रहेगी।
00
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

