शिवरीनारायण 25 दिसंबर 2025(आरएनएस) माता शबरी की तपोभूमि और भगवान नर–नारायण की पावन नगरी शिवरीनारायण में जहाँ श्रद्धा, अनुशासन और मर्यादा की अपेक्षा की जाती है, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ही नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाए जाने का मामला सामने आया है। नगर में नो पार्किंग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी सड़क के बीच वाहन खड़े कर निश्चिंत होकर दर्शन करने जाते देखे गए।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कार्यपालिका मजिस्ट्रेट/तहसीलदार जैसे जिम्मेदार पद पर आसीन अधिकारी भी बीच सड़क पर वाहन खड़ा कर नियमों की अनदेखी करते नजर आए। जिस सड़क से होकर हजारों की संख्या में दर्शनार्थी गुजरते हैं, उसी मार्ग को प्रशासनिक लापरवाही का अड्डा बना दिया गया।
इस अव्यवस्था के कारण नगर में बाहर से आए श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। संकरी सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रही, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को घंटों पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ा। आस्था के लिए आए लोग व्यवस्था को कोसते नजर आए।
नगरवासियों में इसे लेकर जबरदस्त आक्रोश है। लोगों का सीधा और तीखा सवाल है—
क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए ही बने हैं?
क्या सरकारी अधिकारियों पर नियम लागू नहीं होते?
यदि अधिकारी स्वयं नियम तोड़ेंगे तो आम लोग क्यों पालन करें?
स्थानीय लोगों का कहना है कि आम नागरिक अगर कुछ मिनट के लिए भी नो-पार्किंग में वाहन खड़ा कर दे, तो तुरंत चालान थमा दिया जाता है। लेकिन जब वही गलती सरकारी अधिकारी करते हैं, तो नियम और कानून मौन साध लेते हैं। यह दोहरा रवैया न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
आस्था की नगरी में इस तरह की अराजकता ने प्रशासन की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दोनों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। नागरिकों की मांग है कि नो-पार्किंग नियमों का सख्ती से पालन सभी पर समान रूप से कराया जाए, चाहे वह आम व्यक्ति हो या ऊँचे पद पर बैठा अधिकारी। साथ ही दर्शन स्थलों के आसपास सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
यदि समय रहते प्रशासन ने आत्ममंथन नहीं किया, तो यह संदेश जाएगा कि शिवरीनारायण में कानून नहीं, बल्कि पद और प्रभाव चलता है—जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी


















