काशीपुर 25 दिसंबर (आरएनएस)। सिविल जज सीनियर डिवीजन गुंजन सिंह की अदालत ने न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद कथित रूप से भूखंड पर जबरन कब्जा, तोडफ़ोड़ और मारपीट के मामले में रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा समेत नौ लोगों को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी को 23 जनवरी को स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। वादी पक्ष की ओर से प्रस्तुत अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय द्वारा पारित निषेधाज्ञा आदेश की जानकारी होने के बावजूद आरोपियों ने उसका उल्लंघन किया। याचिकाकर्ता कांता प्रसाद गंगवार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत को बताया कि वह वार्ड नंबर छह/बीस स्थित एक भूखंड पर पिछले लगभग 30 वर्षों से काबिज हैं। इस भूमि पर उनके ट्रस्ट के माध्यम से चंद्रदेव, मां काली और भैरव बाबा का मंदिर स्थापित है। मंदिर की नियमित देखरेख के लिए ट्रस्ट द्वारा एक पुजारी भी नियुक्त किया गया है। मामले में अदालत ने चार अक्तूबर को वादी के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश पारित किया था, जो छह जनवरी 2026 तक प्रभावी है। याचिकाकर्ता के अनुसार, स्टे ऑर्डर की जानकारी होने के बावजूद 21 दिसंबर को विधायक शिव अरोरा अपने साथियों गेदन लाल चंद्रा, राम प्रसाद चंद्रा, धर्मपाल, सत्यपाल चंद्रा, टीकाराम, ओमप्रकाश, राजेंद्र ‘पानी वालाÓ और विजय पाल तथा करीब सौ अज्ञात लोगों के साथ विवादित भूखंड पर पहुंचे। आरोप है कि मौके पर पहुंचकर कमरे का ताला तोड़ा गया और वहां रखा कीमती सामान व नकदी उठा ली गई। मंदिर परिसर में तोडफ़ोड़ की गई। बताया कि विधायक के कथित निर्देश पर पुजारी रामचंद्र के साथ लात-घूंसे से मारपीट की गई और उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया। जब मौके पर मौजूद काजल गंगवार ने न्यायालय के आदेश का हवाला दिया तो आरोप है कि विधायक आगबबूला हो गए और उनके कहने पर काजल गंगवार तथा बीच-बचाव में आई मीना के साथ भी मारपीट की गई। वादी पक्ष ने इसे सीधे तौर पर न्यायालय के आदेशों की अवमानना बताया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए विधायक शिव अरोरा समेत नौ आरोपितों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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