बागेश्वर 2 जनवरी (आरएनएस)। उत्तरायणी मेले को भव्य व दिव्य बनाने के लिए 17 समितियों के साथ बैठक हुई। बैठक में झोड़ा और चाचरी विधा को विशेष जगह देने की मांग जोर-शोर से उठी। साथ ही जगराते की रात आने वाले बैर-भगनौल गायकों को विशेष सुविधा देने की मांग की। इसके साथ कई अन्य सुझाव लोगों ने नगर पालिका के सामने रखे। नगर पालिका परिसर में शुक्रवार को आयोजित आगामी उत्तरायणी मेले की तैयारियों को लेकर गठित सभी मेला समितियों की एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। लोगों ने खुले मंच से विचार रखे और उत्तरायणी मेले को भव्य, सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। अधिकतर वक्ताओं ने मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने और उत्तराखंड की पारंपरिक प्रथाओं, संस्कृति एवं लोक परंपराओं को सहेजने पर विशेष जोर दिया। मेलाधिकारी प्रियंका रानी ने कहा कि उत्तरायणी मेला किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे जिले का मेला है, जिसे भव्य और सफल बनाने के लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने सभी समिति सदस्यों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया और सभी के सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि उत्तरायणी मेले के अवसर पर नगर को सुंदर और आकर्षक रूप देने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि यह ऐतिहासिक मेला अपनी गरिमा और परंपरा के अनुरूप भव्य रूप में आयोजित हो सके। बैठक का मुख्य उद्देश्य उत्तरायणी मेले की रूपरेखा तैयार करना तथा सभी समिति सदस्यों को उनके दायित्वों और जिम्मेदारियों के बारे में अवगत कराना था। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष शेभा आर्या, ईओ नगर पालिका विनोद कुमार जीना, परियोजना निदेशक शिल्पी पंत, विधायक प्रतिनिधि भास्कर दास, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभा गडिय़ा, रेडक्रॉस के चेयमैन इंद्र सिंह फस्र्वाण, बंसती देव,जयंत भाकुनी, रधुवीर दफौटी, सभासद, नरेंद्र खेतवाल, दलीप खेतवाल, इंद्र सिंह परिहार, किशन मलड़ा आदि मौजूद रहे।
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