देहरादून 6 जनवरी (आरएनएस)। पंद्रह वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को साक्षर बनाने की दिशा में चल रहे उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत एससीईआरटी सभागार में एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम हुआ। जिसमें उत्तराखंड और पंजाब से कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी, शिक्षाविद और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र में गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक की भूमिका केंद्रीय होनी चाहिए। शिक्षक यदि स्वयं सकारात्मक और प्रसन्नचित्त रहेगा, तो शिक्षार्थियों के व्यक्तित्व विकास पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अपर निदेशक एससीईआरटी पद्मेंद्र सकलानी ने कहा कि उत्तराखंड में उल्लास कार्यक्रम को पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। निदेशक एससीईआरटी वंदना गब्र्याल ने बताया कि राज्य ने अतिरिक्त शैक्षिक सामग्री का निर्माण करने के साथ उसका क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद भी किया है। एनसीईआरटी की प्रो. उषा शर्मा ने उल्लास कार्यक्रम के उद्देश्यों, इसकी संरचना और अभिमुखीकरण के दौरान होने वाली विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। पंजाब के नोडल अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि लोगों को पढऩे के लिए प्रेरित करना चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन पंजाब में विभिन्न प्रयासों के जरिए लोगों को साक्षरता की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड राज्य में तैयार की गई अतिरिक्त पठन सामग्री का विमोचन किया गया। विभिन्न सत्रों में कार्यक्रम के सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। समापन सत्र में एनसीईआरटी की डा. याचना गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों का आभार जताया। एससीईआरटी उत्तराखंड की ओर से कार्यक्रम का समन्वय डा. हरेंद्र अधिकारी ने किया। इस अवसर पर उप निदेशक पल्लवी नयन, अजीत भंडारी, डा. कुलदीप, डा. ऋषभ मिश्रा, प्रो. सीमा धवन, डा. अवनीश उनियाल, देवराज राणा, हिमानी थापा सहित कई शिक्षाविद और अधिकारी मौजूद रहे।
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