प्रयागराज 7 जनवरी (आरएनएस)। यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा निरस्त कर दी गई है। यह फैसला खुद मुख्यमंत्री योगी ने लिया है। यूपी एसटीएफ को इस परीक्षा में धांधली और अवैध धन वसूली का पता चला था। एसटीएफ ने आउटसोर्स के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया था। ठगों ने फर्जी पेपर बनाकर अभ्यर्थियों से वसूली की थी। सीएम योगी ने जांच के आदेश दिए थे।
सरकार ने धांधली के आरोप लगने के बाद इस परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 33 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। एक लाख से ज्यादा आवेदन आए थे।
16 और 17 नवंबर, 2025 को प्रदेश के 52 केंद्रों पर परीक्षा हुई थी। 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने नतीजे घोषित किए थे। अब इंटरव्यू होना था। सीएम योगी ने आयोग को जल्द परीक्षा कराए जाने का निर्देश दिया है।
यूपी एसटीएफ ने 20 अप्रैल, 2025 को असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया था। गिरोह परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी कर रहा था। गैंग के तीन सदस्य महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल गिरफ्तार हुए थे। जांच में सामने आया कि आरोपी आउटसोर्स कर्मचारी महबूब अली ने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान पेपर निकाल लिया। अभ्यर्थियों को लाखों रुपए में बेचा था। इसके बाद अन्य संदिग्ध अभ्यर्थियों की भूमिका भी सामने आई, जिससे परीक्षा में धांधली की पुष्टि हुई।
शासन स्तर से एक कमेटी भी बनाई गई थी। कहा गया था कि यह कमेटी इस भर्ती की लिखित परीक्षा के आगे की प्रक्रिया में आयोग को सहयोग करेगी। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल की ओर से विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने एक लेटर जारी किया था। कमेटी में प्रयागराज के एडीएम सिटी सत्यम मिश्र, उप्र पुलिस भर्ती बोर्ड की एडिशनल एसपी गीतांजलि सिंह, एसटीएफ के एडिशनल एसपी विशाल विक्रम सिंह, उच्च शिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक अजीत कुमार सिंह को शामिल किया गया।
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