लखनऊ 9 जनवरी (आरएनएस )। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में 10 से 12 जनवरी तक तीन दिवसीय विश्वविद्यालय दिवस समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष समारोह की थीम ‘बाबासाहेब के विचार एवं विकसित भारत की संकल्पनाÓ निर्धारित की गई है। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन 10 जनवरी को होगा, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल करेंगे। उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एवं चाणक्य विश्वविद्यालय, बैंगलोर के प्रो. के.वी. राजू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में बीबीएयू के पूर्व कुलपति प्रो. बी. हनुमैया तथा मुख्य वक्ता के तौर पर पूर्व सलाहकार, शिक्षा, योजना आयोग, भारत सरकार, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति एवं राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. फुरकान कमर भाग लेंगे।विश्वविद्यालय दिवस समारोह की रूपरेखा साझा करते हुए कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि तीन दिवसीय कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आने वाले 22 वर्षों का एक स्पष्ट, दूरदर्शी और प्रभावी रोडमैप तैयार करना है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप योजनाओं और उद्देश्यों का स्पष्ट निर्धारण आवश्यक है, ताकि भारत की प्रगति में विश्वविद्यालय और अकादमिक जगत सार्थक योगदान दे सकें। वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचारों ने शिक्षा सहित कई क्षेत्रों को नया स्वरूप दिया है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में एआई और एनईपी-2020 की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए रोजगार के अवसर बढ़ाने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और पाठ्यक्रमों को अधिक कौशल-आधारित बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और शोध कार्यों को सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।कुलपति ने एनईपी-2020 पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इस नीति ने उच्च शिक्षा संस्थानों में बहुविषयक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने, भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन तथा आउटकम-बेस्ड लर्निंग के माध्यम से विद्यार्थियों और संस्थानों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने भारत रत्न बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के स्वप्न को साकार करने के लिए ‘एक्सीलेंस और इक्विटीÓ के विजन को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज में सकारात्मक बदलाव की सबसे मजबूत आधारशिला है। उन्होंने संस्थागत विकास योजना के संदर्भ में आत्मनिर्भर भारत, समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, स्वभाषा, स्वबोध, कर्तव्यबोध और परिवार प्रबोधन जैसे घटकों की महत्ता को रेखांकित किया। साथ ही युवाओं तक स्वामी विवेकानंद के विचारों और आदर्शों को पहुंचाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि सशक्त युवा ही सशक्त भारत की नींव हैं।समारोह के दूसरे दिन 11 जनवरी को विश्वविद्यालय द्वारा ‘विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि हेतु सामाजिक परिवर्तन का आह्वानÓ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल करेंगे। संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान लखनऊ के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानन्द प्रसाद गुप्त, अम्बेडकर फाउंडेशन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सदस्य डॉ. चमन लाल बंगा, आयोजन समिति बीबीएयू के चेयरपर्सन प्रो. राजशरण शाही, इतिहासवेत्ता एवं सामाजिक चिंतक संजय हर्ष, तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुव सेन सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे। इस दौरान समरसता, स्वभाषा के संरक्षण, स्वदेशी और स्वबोध की भावना, पर्यावरण संरक्षण, कर्तव्यबोध और परिवार प्रबोधन जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।तीसरे दिन 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर स्वदेशी संकल्प दौड़ का आयोजन किया जाएगा, जिसका उद्घाटन उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल करेंगे। इस अवसर पर प्रो. राजशरण शाही, सामाजिक कार्यकर्ता कश्मीरी लाल, इनक्यूबेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप बीबीएयू के कंसल्टेंट डॉ. मनोज जोशी तथा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. विनोद सोलंकी आमंत्रित रहेंगे। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा, जो रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देगा।
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