कोलकाता/नई दिल्ली 12 Jan, (Rns) । कोलकाता के आई-पैक दफ्तर में ईडी की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दखल ने सियासी भूचाल ला दिया है। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सीएम पर जांच में बाधा डालने और फाइलें छीनने का आरोप लगाया है।
एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने संविधान के आर्टिकल 32 के तहत भारत के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आई-पैक कोयला घोटाले की जांच में दखलअंदाजी का आरोप लगाया गया। यह याचिका पिछले हफ्ते की घटनाओं के बाद दायर की गई, जब ईडी के अधिकारी जांच के सिलसिले में कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी या आई-पैक के ऑफिस में तलाशी ले रहे थे। ऑपरेशन के दौरान, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कथित तौर पर पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ आई-पैक ऑफिस पहुंचीं और ईडीअधिकारियों से भिड़ गईं। ईडीने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने रेड के दौरान परिसर से कुछ फाइलें ले लीं, जिससे जांच में और रुकावट आई। ईडी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली है। इधर भाजपा ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीखे हमले करते हुए पूछा कि आखिर उस ‘हरी फाइल’ में ऐसा क्या राज छिपा था, जिसे बचाने के लिए मुख्यमंत्री को खुद एक प्राइवेट कंसल्टेंसी फर्म के दफ्तर भागना पड़ा। इस सियासी खींचतान के बीच बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर भी हमला हुआ है, जिसे भाजपा ने ‘हरी फाइल’ कांड से ध्यान भटकाने की साजिश करार दिया है। ईडी के अनुसार, तलाशी वाली जगह पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी और दस्तावेजों को कथित तौर पर हटाने से अधिकारियों पर दबाव पड़ा और एजेंसी के अपने कानूनी कामों को स्वतंत्र रूप से करने की क्षमता पर गंभीर असर पड़ा। एजेंसी ने राज्य प्रशासन पर बार-बार रुकावट डालने और असहयोग का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले ईडी ने इसी घटना के संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट में सुरक्षा और उचित निर्देशों की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले स्थगित कर दिया। अब इस मामले की सुनवाई 14 जनवरी को होनी है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने भी ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सुप्रीम कोर्ट में अपनी आर्टिकल 32 याचिका में ईडी ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन द्वारा स्वतंत्र जांच के लिए यह तर्क देते हुए निर्देश मांगे हैं कि राज्य की कार्यपालिका द्वारा कथित दखलअंदाजी को देखते हुए एक निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी की आवश्यकता है। इस बीच सत्ताधारी ऑल इंडिया तृणमूल ने ईडी के आरोपों से इनकार किया और रेड के संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट का भी रुख किया। तृणमूल ने आरोप लगाया कि पार्टी के चुनाव सलाहकार आई-पैक के खिलाफ ईडी की कार्रवाई गोपनीय चुनावी रणनीति सामग्री तक पहुंचने के मकसद से की गई एक गलत कोशिश थी। पार्टी ने कहा कि आई-पैक उसके चुनावी रणनीतिकार के तौर पर काम करता है और केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई का मकसद किसी वास्तविक जांच को आगे बढ़ाने के बजाय उसकी चुनावी तैयारियों को बाधित करना है।
बहरहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘फाइल’ और ‘फर्जीवाड़े’ का रिश्ता पुराना है लेकिन आई-पैक दफ्तर का ताजा घटनाक्रम किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। रविशंकर प्रसाद ने संवैधानिक नैतिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ममता बनर्जी का यह तर्क गले नहीं उतरता कि वह वहां मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि पार्टी अध्यक्ष के तौर पर गई थीं। सवाल यह है कि क्या एक मुख्यमंत्री की संवैधानिक शपथ उन्हें किसी जांच एजेंसी की रेड में घुसने और वहां से दस्तावेज ले जाने की इजाजत देती है? भाजपा का आरोप है कि बंगाल पुलिस अब राज्य की जनता की रक्षक नहीं बल्कि तृणमूल कांग्रेस की निजी जागीर बन गई है। जब पुलिस कमिश्नर और डीजीपी खुद मुख्यमंत्री के साथ एक निजी इमारत की 11वीं मंजिल पर रेड रोकने पहुंच जाएं तो प्रशासनिक निष्पक्षता का जनाजा निकलना तय है। रविशंकर प्रसाद ने साफ कहा कि यह ‘क्विड प्रो को’ यानी ‘तुम मुझे बचाओ, मैं तुम्हें बचाऊंगा’ का खेल है।
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