ईरान ,13 जनवरी । ईरान में बीते कई दिनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। देशभर में चल रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई विरोधी आंदोलन के दौरान अब तक 500 से अधिक लोगों की मौत की खबर है, जबकि 10 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है। इसी बीच ईरानी प्रशासन ने आंदोलन से जुड़े एक मामले में पहली बार फांसी की सजा लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 26 वर्षीय एरफान सोल्तानी को जल्द ही फांसी दी जा सकती है। सोल्तानी पर खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है। वह तेहरान के पास स्थित कराज शहर के फर्दीस इलाके का निवासी है और उसे 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।
डर का संदेश देने की कोशिश?
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि मौजूदा आंदोलन के दौरान यह पहली बार होगा जब किसी प्रदर्शनकारी को फांसी दी जाएगी। इससे पहले सरकार विरोधी गतिविधियों को कुचलने के लिए गोली मारकर मौत की सजा दिए जाने की खबरें सामने आती रही हैं। इजराइल और अमेरिका स्थित न्यूज पोर्टल छ्वद्घद्गद्गस्र के अनुसार, एरफान सोल्तानी का मामला भविष्य में और कड़ी कार्रवाई की शुरुआत का संकेत हो सकता है, ताकि आम लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने से डरें।
नॉर्वे में पंजीकृत कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ (॥द्गठ्ठद्दड्ड2) ने इस पूरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का गंभीर उल्लंघन बताया है।
बुनियादी अधिकारों से वंचित
रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद से ही एरफान सोल्तानी को न तो स्वतंत्र वकील से मिलने दिया गया और न ही अदालत में अपना बचाव पेश करने का अवसर मिला। परिवार को भी काफी समय तक यह जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किस सुरक्षा एजेंसी ने हिरासत में लिया है।
हेंगॉ के हवाले से बताया गया है कि 11 जनवरी को सोल्तानी के परिवार को उनकी मौत की सजा की सूचना दी गई। इसके बाद उन्हें केवल 10 मिनट के लिए मुलाकात की अनुमति दी गई। परिवार के एक करीबी सूत्र के अनुसार, अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि फैसला अंतिम है और तय समय पर उसे लागू किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि सोल्तानी की बहन, जो पेशे से वकील हैं, उन्होंने कानूनी तरीके से सजा को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अब तक केस फाइल देखने या अपने भाई का पक्ष रखने की अनुमति नहीं दी गई है।
आर्थिक संकट से सत्ता विरोध तक
लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई उद्यमी मारियो नॉफल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया है कि खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों में अब तक करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान में 28 दिसंबर को बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए थे। पहले यह आंदोलन तेहरान के बाजारों तक सीमित रहा, लेकिन जल्द ही यह देश के अन्य शहरों में फैल गया। दुकानदारों, छात्रों और आम नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर राजनीतिक बदलाव की मांग तेज कर दी।
अब यह आंदोलन बीते कई वर्षों में ईरान की सरकार और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ सबसे बड़ा राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन माना जा रहा है, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता बढऩे के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता गहराती जा रही है।
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