जुड़वा बच्चों की मौत से मचा हड़कंप
सुलतानपुर/चांदा 14 जनवरी (आरएनएस )। चांदा बाजार में अवैध रूप से संचालित सहारा बाल चिकित्सालय पर आखिरकार स्वास्थ्य विभाग की गाज गिर गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के आदेश पर मंगलवार को सीएमओ कार्यालय की टीम ने अस्पताल पर छापा मारकर उसे सील कर दिया, जबकि अस्पताल का संचालक आकाश मिश्रा मौके से फरार पाया गया। इस मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। सीएमओ कार्यालय की टीम ने 13 जनवरी को यह कार्रवाई उस समय की जब यह सामने आया कि सहारा बाल चिकित्सालय बिना पंजीकरण के चल रहा था। छापेमारी के दौरान अस्पताल में भारी अनियमितताएं पाई गईं। टीम में जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. आर.के. कन्नौजिया, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे.सी. सरोज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पीपी कमैचा के अधीक्षक डॉ. आर.सी. यादव, वरिष्ठ सहायक विजय कुमार तथा पुलिस बल के उप-निरीक्षक अवधेश सिंह यादव और उमा शंकर यादव शामिल रहे।जांच में सामने आया कि अस्पताल न तो सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत था और न ही इलाज से जुड़े मानकों का पालन किया जा रहा था। छापेमारी के समय अस्पताल के कथित प्रबंधक निकिता तिवारी और शिवांग मिश्रा मौजूद थे, लेकिन संचालक आकाश मिश्रा (निवासी रामगढ़) मौके से नदारद मिले। यह कार्रवाई उस दर्दनाक मामले के बाद हुई जिसमें सराकल्याण (दारापुर) निवासी संदीप उमर वैश्य के जुड़वा नवजात बच्चों की मौत हो गई थी। संदीप वैश्य की पत्नी किरण ने 26 दिसंबर को लंभुआ के एक निजी अस्पताल में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। बच्चों की गंभीर हालत बताकर उन्हें पीपी कमैचा स्थित सहारा बाल चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां 27 दिसंबर को एक नवजात की मौत हो गई। इसके बाद 12 जनवरी को दूसरे बच्चे की भी मौत हो गई।लगातार दो मौतों से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पीपी कमैचा के अधीक्षक की तहरीर पर चांदा कोतवाली में केस दर्ज किया गया है। अब सवाल यह है कि बिना पंजीकरण के चल रहे इस अस्पताल पर कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई और आखिर मासूमों की जान जाने के बाद ही प्रशासन क्यों जागा?
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