लखनऊ 14 जनवरी (आरएनएस ): उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य कृषि विकास योजना (स््रष्ठक्क) के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। शासन द्वारा अनुदान संख्या-11 के लेखाशीर्षक 2401 फसल कृषि कर्म, 00-800 अन्य व्यय, 04 कृषि क्षेत्र की क्षमता एवं कौशल विकास तथा उत्पादन वृद्धि की योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधीन संचालित कामन इन्क्यूबेशन सेंटरों में विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए 206.00 लाख रुपये, अर्थात दो करोड़ छह लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति पुनर्विनियोग के माध्यम से प्रदान की गई है। इस संबंध में आवश्यक शासनादेश जारी कर दिया गया है।जारी शासनादेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्वीकृत धनराशि का आहरण और व्यय केवल अनुमोदित कार्ययोजना तथा योजना के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों, गाइडलाइन्स और प्रासंगिक नियमों के अनुरूप ही किया जाएगा। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूर्व में निर्गत धनराशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र और व्यय विवरण सुसंगत अभिलेखों के साथ शासन को उपलब्ध कराए जाने के उपरांत ही इस स्वीकृत धनराशि का व्यय किया जाएगा। इसके साथ ही नियोजन विभाग के निर्देशों और स्वीकृत परियोजना प्रारूप का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।शासनादेश में कहा गया है कि इस वित्तीय स्वीकृति के अंतर्गत होने वाले सभी व्यय भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नीतिगत दिशा-निर्देशों और गाइडलाइन्स के अनुरूप होंगे। धनराशि को सुसंगत वित्तीय एवं क्रय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार व्यय करने तथा प्रत्येक व्यय में निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम स्तर से अनुमोदन प्राप्त करने की जिम्मेदारी कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश लखनऊ और निदेशक, खाद्य प्रसंस्करण की होगी।उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस संबंध में खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कामन इन्क्यूबेशन सेंटरों को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के लिए आवश्यक सभी कार्यवाहियां तत्परता और प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाएं। उनका कहना है कि इन्क्यूबेशन सेंटरों में बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर विद्युत कनेक्शन की उपलब्धता से खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों को बेहतर वातावरण मिलेगा, जिससे कृषि आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।सरकार के इस फैसले को प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे राज्य कृषि विकास योजना के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने में तेजी आएगी और किसानों तथा उद्यमियों दोनों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
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