लखनऊ 14 जनवरी (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश में एसआईआर (गहन पुनरीक्षण) के नाम पर हो रहे कथित फर्जीवाड़े को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी, योगी सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को लखनऊ स्थित आम आदमी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के साथ अब तक का सबसे बड़ा घोटाला किया गया है, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र और संविधान पर हमला है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।संजय सिंह ने कहा कि कुछ ही समय पहले उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारियों द्वारा तैयार की गई मतदाता सूचियों के आधार पर यह दावा किया गया था कि प्रदेश में कुल 17 करोड़ मतदाता हैं। यही सूचियां ग्राम पंचायत, बीडीसी, जिला पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में इस्तेमाल की गईं। लेकिन जब गहन पुनरीक्षण के नाम पर दोबारा प्रक्रिया की गई तो अचानक यह संख्या घटाकर 12 करोड़ 55 लाख कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक महीने के भीतर साढ़े चार करोड़ मतदाता कहां गायब हो गए। यह कोई साधारण प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि पूरी तरह से योजनाबद्ध धांधली है।आप सांसद ने कहा कि यदि गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया सही थी तो यह बताया जाए कि 4 करोड़ 50 लाख मतदाताओं को किस आधार पर मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही इतनी बड़ी संख्या में वोटरों को हटाया गया, उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा हर बूथ पर 200 वोट बढ़ाने की बात कही गई। संजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में लगभग एक लाख 77 हजार बूथ हैं, यानी भाजपा करीब साढ़े तीन करोड़ नए वोट जोडऩे की तैयारी में है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके लिए बिहार, हरियाणा, दिल्ली, मुंबई और राजस्थान जैसे राज्यों से लोगों को लाकर उत्तर प्रदेश में फर्जी तरीके से मतदाता बनाया जा रहा है।संजय सिंह ने कहा कि भाजपा पहले वोट काटने की सूची तैयार करती है और फिर वोट जोडऩे की सूची लेकर आती है, जबकि विपक्ष और आम जनता के मतदाता दर-दर भटकते रह जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के एक विधायक द्वारा खुले तौर पर यह कहना कि उनके 18 हजार वोट बढ़ गए हैं, इस पूरे खेल की सच्चाई को उजागर करता है।प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने एसआईआर के तहत अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार फॉर्म 6 नए मतदाताओं के लिए, फॉर्म 7 स्थानांतरित या हटाए गए मतदाताओं के लिए और फॉर्म 8 त्रुटियों के सुधार के लिए होता है। इन फॉर्मों के आधार पर बीएलओ को फॉर्म 9, 10 और 11 भरकर रिकॉर्ड तैयार करना होता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने खुद स्वीकार किया है कि करीब 2 करोड़ 17 लाख लोग शिफ्टेड या अनट्रेसेबल बताए गए हैं। ऐसे में इन सभी के फॉर्म 10 सार्वजनिक किए जाएं ताकि सच्चाई सामने आ सके।संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने 46 लाख लोगों को मृत और 25 लाख वोटों को डुप्लीकेट घोषित किया है। उन्होंने चुनौती दी कि इन सभी मामलों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि जिंदा लोगों को मृत और मृत लोगों को जिंदा दिखाया गया है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक है।उन्होंने कन्नौज, रामपुर, लखनऊ, सुल्तानपुर, नोएडा, बहराइच और कानपुर देहात के उदाहरण देते हुए कहा कि कहीं एक ही घर में 18 से लेकर 49 तक वोट दर्ज हैं, कहीं जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है और कहीं मृत लोगों को जीवित दिखाया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जैसे किसी को दैवीय शक्ति मिल गई हो, जो मरे को जिंदा और जिंदा को मरा कर दे रहा है।
संजय सिंह ने चेतावनी दी कि यह सिर्फ वोट का मामला नहीं है, बल्कि लोगों की संपत्ति और अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि फर्जी फैमिली रजिस्टर के जरिए भविष्य में लोगों की जमीन और संपत्ति पर भी दावा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के नाम पर उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है और यदि सुप्रीम कोर्ट इसकी गहन जांच कराता है तो कई लोग जेल जाएंगे।आप सांसद ने बताया कि वह इस मुद्दे पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिख रहे हैं और आने वाले संसद सत्र में भी इसे जोरदार तरीके से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कनाडा की पूरी आबादी से ज्यादा लोगों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
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