तेहरान ,20 जनवरी । बीते साल दिसंबर के अंत में शुरू हुए प्रदर्शनों ने ईरान को हिलाकर रख दिया था। अब हालात काफी हद तक शांत हो गए हैं और खामेनेई शासन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान के शीर्ष पुलिस अधिकारी ने सोमवार को ‘दंगाइयोंÓ को तीन दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का अल्टीमेटम दिया है, चेतावनी दी है कि ऐसा न करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने साथ ही यह भी कहा है कि वह उन आर्थिक समस्याओं से निपटेगी, जिनकी वजह से प्रदर्शन भड़के थे। हालांकि मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि प्रदर्शन दबाने की कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए हैं। महंगाई और ईरानी मुद्रा की गिरावट से शुरू हुए ये प्रदर्शन जल्द ही खामेनेई शासन को हटाने की मांग में बदल गए। हालात काबू में करने के लिए सरकार ने इंटरनेट सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय कॉल्स पर रोक लगा दी थी, जिससे वास्तविक स्थिति की जानकारी सीमित रही। अधिकारियों का कहना है कि इंटरनेट धीरे-धीरे बहाल किया जाएगा।
पुलिस प्रमुख अहमद-रेजा रादान ने कहा कि कुछ युवा भ्रम में दंगों में शामिल हुए और यदि वे आत्मसमर्पण करते हैं तो उनके साथ नरमी बरती जाएगी। वहीं सरकार का दावा है कि प्रदर्शनों को हिंसक बनाने में अमेरिका और इजरायल की भूमिका रही।
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि ईरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मौत की सजा को धमकी के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में हजारों गिरफ्तारियां हुई हैं और मृतकों की संख्या 3,000 से अधिक हो सकती है, जबकि वास्तविक आंकड़ा इससे ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है।
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