रविवार को हुए इस दर्दनाक हादसे में बस सवार 100 से अधिक यात्री घायल हुए थे। घायलों का इलाज झारखंड के रांची व गुमला के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर और बलरामपुर के विभिन्न अस्पतालों में जारी है। वहीं हादसे में जान गंवाने वाले सभी मृतकों के शव जब उनके पैतृक गांव पहुंचे, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
दुर्घटना में मृतकों में प्रेमा देवी, सीतापती देवी, रेसंती चेरवा, सुखना भुइयां, विजय नगेसिया, सोनामती, लीलावती सोनवानी, रमेश पनिका, नाचू राम और परशुराम सोनवानी शामिल हैं। इनमें से अधिकांश ग्राम पिपरसोत के निवासी थे, जबकि कुछ आसपास के गांवों से थे।
अंतिम संस्कार के दौरान गांव का माहौल बेहद गमगीन रहा। हर आंख नम थी और हर चेहरा इस त्रासदी से स्तब्ध नजर आया। ग्रामीण शिवम सिंह ने बताया कि यह घटना पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि एक ही हादसे में गांव के इतने लोगों को खोना पड़ेगा। यह दर्द जीवन भर हमारे साथ रहेगा।”
इस हादसे ने न सिर्फ कई परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।

