वॉङ्क्षशगटन ,22 जनवरी । अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ाने की धमकियों के बीच भारत और यूरोपीय संघ (श्व) एक-दूसरे के और करीब आते दिख रहे हैं। भारत यात्रा से कुछ दिन पहले यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की हाई रिप्रेजेंटेटिव काजा कल्लास ने दोनों रणनीतिक साझेदारों के रिश्तों में अहम बदलाव की बात कही है।
बुधवार, 21 जनवरी को यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए काजा कल्लास ने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया पहले से कहीं अधिक खतरनाक हो गई है और ऐसे समय में भारत और श्व का मिलकर काम करना दोनों के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने संकेत दिया कि गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर यूरोपीय संघ की शीर्ष लीडरशिप भारत की मुख्य अतिथि हो सकती है। 26 जनवरी के समारोह के बाद 16वीं श्व-इंडिया समिट आयोजित होने की संभावना है, जिसमें कई अहम समझौतों पर मुहर लग सकती है।
काजा कल्लास ने कहा कि भारत यूरोप की आर्थिक मजबूती के लिए लगातार अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि श्व, नई दिल्ली के साथ व्यापार, सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए एक नए और शक्तिशाली एजेंडे पर काम करने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था युद्धों, दबाव और आर्थिक विभाजन के कारण तनाव में है, भारत और श्व का एक-दूसरे के करीब आना बेहद अहम है। कल्लास ने कहा, आज के दौर में दो बड़े लोकतंत्र किसी तरह की हिचक नहीं दिखा सकते। हमारी जिम्मेदारी है कि हम अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और 21वीं सदी के लिए एक प्रभावी बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत बनाए रखें।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच तीन बड़े समझौते होने की संभावना जताई जा रही है। इनमें व्यापार, सुरक्षा और लोगों की आवाजाही से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। 27 जनवरी को श्व–भारत व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी हो सकती है। काजा कल्लास के मुताबिक, यह डील बाजार खोलेगी, व्यापारिक बाधाएं हटाएगी और क्लीन टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और सेमीकंडक्टर जैसे अहम क्षेत्रों में सप्लाई चेन को मजबूत करेगी।
इसके अलावा, श्व और भारत के बीच सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस समझौते से समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी गतिविधियों और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। साथ ही सूचना सुरक्षा समझौते पर बातचीत शुरू की जाएगी। दोनों पक्ष श्रमिकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और उच्च कुशल पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए मोबिलिटी पर सहयोग से जुड़े एक व्यापक ढांचे के तहत समझौता ज्ञापन (रूश) को अंतिम रूप देने की भी तैयारी कर रहे हैं।
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