कोलकाता 23 जनवरी (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का खतरा बढ़ रहा है। लेकिन राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि, घबड़ाने की बात नहीं बरन सतर्क रहने की जरुरत है। राज्य सरकार पूरे मामले पर गंभीर है और निगाह रख रही है। इसी बीच बंगाल में निपाह वायरस से कुल पांच लोगों के संक्रमित होने की खबर है। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने उपरोक्त जानलेवा निपाह वायरस के पांच मामलों की पुष्टि के बाद तुरंत इसे फैलने से रोकने की कोशिश की बात कही। निपाह वायरस के कारण लगभग 100 लोगों को एहतियात के तौर पर घर पर क्वारंटाइन किया गया है। उत्तर 24 परगना के बारासात शहर के आसपास फैला यह आउटब्रेक सबसे पहले सोमवार को पता चला था। शुरुआती दो मरीज, बारासात के एक प्राइवेट अस्पताल के एक पुरुष और एक महिला नर्स, अभी भी इंटेंसिव केयर में हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने संपर्क में आए लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया तेज कर दी और मरीजों के संपर्क में आए लोगों को घर में ही क्वारंटाइन में रहने की सलाह दी। तीनों नए संक्रमित मरीजों को विशेष उपचार के लिए कोलकाता के बेलेघाटा स्थित संक्रामक रोग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, पहले से संक्रमित पाई गई दोनों नर्सें एक निजी अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि एक संक्रमित स्वास्थ्यकर्मी की हालत में सुधार हुआ है, जबकि महिला नर्स की हालत गंभीर बनी हुई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएएच) ने निपाह को एक उच्च जोखिम वाली बीमारी के रूप में वर्गीकृत किया है, क्योंकि यह पशुओं में फैलने वाली बीमारी है और इसके प्रकोप फैलाने की क्षमता है। वर्तमान में इसका कोई टीका या विशिष्ट एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसके प्रसार को रोकने के लिए शीघ्र पहचान, अलगाव और निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने दोहराया है कि मनुष्यों में निपाह वायरस का संक्रमण दुर्लभ है और आमतौर पर फल खाने वाले चमगादड़ों के संपर्क या दूषित फलों के सेवन से जुड़ा होता है। हालांकि छिटपुट मानव-से-मानव संचरण की सूचना मिली है, अधिकारियों ने जोर दिया है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कड़ी निगरानी और रोकथाम के उपाय लागू किए जा रहे हैं।

