पूजा की थीम को लेकर दो वर्गों में बंटे लोग
जयदीप यादव
कोलकाता 23 जनवरी (आरएनएस)। महानगर कोलकाता हो या फिर बीरभूम, नदिया, हुगली, मुर्शिदाबाद या फिर दक्षिण 24 परगना जिला। बंगाल के तमाम जिलों से लेकर महानगर कोलकाता में आज सरस्वती पूजा के मंडप एसआईआर के रंग में रंगे रहे। जहां देखो वहां सरस्वती पूजा पर थीम एसआईआर सिर चढ़कर बोलता दिखा। महानगर कोलकाता में अभिजात्य वर्ग के लोगों के इलाके के तौर पर शुमार बालगंज में बसंत पंचमी के अवसर पर ‘एसआईआरÓ की थीम पर आधारित एक सरस्वती पूजा पंडाल ने लोगों का ध्यान खींचा। एसआईआर के रंग में रंगे बालीगंज साइंस कॉलेज में सरस्वती पूजा को लेकर राजनीति का पारा भी चढऩे लगा है। एक वर्ग ने इसे जहां सराहा तो एक वर्ग का मानना है कि धर्म में इस तरह का प्रयोग ठीक नहीं है। वहीं बीरभूम में बसंत पंचमी के अवसर पर ‘एसआईआरÓ की थीम पर आधारित सरस्वती पूजा का एक पंडाल उत्सुकता की निगाह में रहा। नादिया जिले के शांतिपुर में भी उक्त थीम आम रही। वहीं अगर बात हुगली जिले की करे तो पांडुआ विधानसभा क्षेत्र के बैंचीग्राम में एसआईआर थीम पर आयोजित सरस्वती पूजा ने लोगों का ध्यान खींचा है। इस अनोखी प्रस्तुति को लेकर स्थानीय स्तर पर खूब चर्चा हो रही है। बैंचीग्राम की सुपरस्टार पूजा कमेटी द्वारा आयोजित यह सरस्वती पूजा इस साल अपने 28वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। आयोजकों के अनुसार, हर वर्ष की तरह इस बार भी वे कुछ अलग और सामाजिक संदेश देने वाली थीम प्रस्तुत करना चाहते थे। मौजूदा समय में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर समाज में हो रही चर्चा को देखते हुए, इसी विषय को पूजा की थीम के रूप में चुना गया। इस थीम को लेकर राजनीतिक रंग देने के आरोप भी लगे हैं। स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने दावा किया है कि पूजा में राजनीति को शामिल किया गया है। हालांकि पूजा कमेटी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आयोजकों का कहना है कि इस थीम को गलत नजरिए से देखा जा रहा है और इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या चुनाव आयोग की आलोचना करना नहीं है। बहरहाल जो भी हो लेकिन माता सरस्वती के पूजा को लेकर जिस तरह से एसआईआर को थीम बनाया गया है। इससे राज्य में लोग खेमें में बंट गए है। एक वर्ग इसे सराह रहा है तो दूसरा इसे गलत ठहराने में लगा है और उन्हें इस थीम में राजनीति की बू आ रही है।
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