भोपाल 23 जनवरी (आरएनएस)। भोपाल की पांच साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और निर्मम हत्या के बहुचर्चित मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दोषी अतुल निहाले की फांसी की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयरÓ मामला मानते हुए कहा कि आरोपी का कृत्य अत्यंत बर्बर और अमानवीय है, ऐसे अपराध में किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जा सकती।
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस राजकुमार चौबे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा यह अपराध निर्ममता और हैवानियत की सारी हदें पार करता है। समाज में ऐसा संदेश जाना चाहिए कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। कोर्ट ने भोपाल पॉक्सो कोर्ट द्वारा 10 मार्च 2025 को सुनाई गई फांसी की सजा को यथावत रखते हुए अपील खारिज कर दी।
भोपाल की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म, हत्या एवं अपहरण जैसे तीनों गंभीर अपराधों में दोषी पाते हुए तीन अलग-अलग मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी। भोपाल के अतुल निहाले ने बलात्कार और हत्या के आरोप में फांसी की सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
दरअसल, ये घटना 24 सितंबर 2025 की है। जब शाहजहांबाद इलाके में रहने वाली पांच वर्षीय बच्ची अपनी दादी के साथ घर पर थी। दादी ने उसे पास ही ‘बड़े पापाÓ के घर से किताब लाने भेजा था। इसके बाद बच्ची गायब हो गई। काफी तलाश के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला तो बच्ची के परिवार वालों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
पुलिस की गहन जांच के बाद वाजपेई नगर मल्टी स्थित आरोपी के घर से बच्ची का शव बरामद हुआ। शव को प्लास्टिक की पानी की टंकी में छिपाकर रखा गया था, जिसे देखकर परिजन और पुलिसकर्मी भी सन्न रह गए। जांच में सामने आया कि आरोपी अतुल निहाले ने बच्ची का अपहरण किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर गला दबाकर हत्या कर दी।
वहीं जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी की मां और बहन ने सबूत छिपाने में उसका साथ दिया था। पुलिस ने उनके खिलाफ भी कार्रवाई की।
भोपाल कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने इस जघन्य अपराध को विरलतम से विरलतम श्रेणी का मामला बताया था। कहा था कि अगर मृत्युदंड से भी बड़ी कोई सजा होती, तो वह आरोपी को दी जानी चाहिए थी।

