ढाका ,25 जनवरी। बांग्लादेश में आम चुनावों की सरगर्मियों के बीच अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। ताजा और बेहद खौफनाक मामला नरसिंदी से आया है, जहां शुक्रवार की रात 23 वर्षीय चंचल भौमिक की निर्मम हत्या कर दी गई। वहीं, कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के नेताओं द्वारा दिए जा रहे भड़काऊ बयानों ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है।
शटर गिराकर दुकान में लगा दी आग
नरसिंदी में हुई घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। चंचल भौमिक शुक्रवार की रात अपनी दुकान (गैराज) के अंदर सो रहा था। इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने बाहर से दुकान का शटर गिरा दिया और पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। चश्मदीदों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, हमलावर तब तक बाहर खड़े रहे जब तक चंचल की चीखें खामोश नहीं हो गईं। आग की लपटों में घिरकर चंचल की दर्दनाक मौत हो गई।
मृतक चंचल अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। उसके कंधों पर बीमार मां और एक दिव्यांग भाई की जिम्मेदारी थी। पड़ोसियों का कहना है कि वह बेहद शांत और मेहनती युवक था। पीडि़त परिवार ने आरोप लगाया है कि यह कोई लूटपाट या साधारण अपराध नहीं, बल्कि धार्मिक नफरत से प्रेरित एक सोची-समझी हत्या है। इससे पहले दीपु चंद्र दास और खोकोन चंद्र दास जैसे हिंदू युवाओं के साथ भी इसी तरह की दरिंदगी की जा चुकी है।
जमात नेता ने उगला जहर, कहा- संसद में हिंदुओं की जगह नहीं
जमीनी स्तर पर हो रही इस हिंसा को हवा देने में कट्टरपंथी संगठनों की बयानबाजी अहम भूमिका निभा रही है। जमात-ए-इस्लामी के नेता और बरगुना-2 सीट से उम्मीदवार अफजल हुसैन ने हाल ही में एक विवादित बयान देकर आग में घी डालने का काम किया है। एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए हुसैन ने खुलेआम कहा कि जिस देश में 80 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है, वहां की संसद में गैर-मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने देश के संविधान को खारिज करते हुए मध्ययुगीन दंड विधान, जैसे कि हाथ काटने जैसी सजाओं को लागू करने की वकालत की है।
गाजीपुर में भी व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या
हिंसा का यह दौर केवल नरसिंदी तक सीमित नहीं है। अभी एक सप्ताह पहले ही गाजीपुर में एक मामूली विवाद ने सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया था। वहां केले के एक गुच्छे को लेकर हुए विवाद में हिंदू व्यवसायी लिटन चंद्र घोष की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। लिटन ‘बैशाखी स्वीटमीट एंड होटलÓ के मालिक थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी मासूम मियां के बागान से केले का एक गुच्छा गायब हुआ था, जो उसे लिटन की दुकान में दिखा। इसी बात पर बहस शुरू हुई और आरोपी मासूम, उसके पिता स्वपन मियां (55) और मां माजेदा खातून (45) ने मिलकर लिटन पर हमला कर दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने लिटन को लात-घूंसों से इतना पीटा कि वह जमीन पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, लेकिन इन लगातार हो रही घटनाओं से हिंदू समुदाय में दहशत का माहौल है।
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