जगदीश यादव
कोलकाता 27 जनवरी (आरएनएस)। महानगर कोलकाता के आनंदपुर इलाके में दो गोदामों में अगलगी की घटना में अब तक 8 लोगों को शव मिले हैं। लेकिन मलवे से जो मृत शरीर मिले हैं वह अगलगी में इस तरह से जल गए हैं की उनकी पहचान मुश्किल है। ऐसे में अब डीएनए टेस्ट ही शवों की शिनाख्ती का एक मात्र सहारा है। वहीं नरेंद्रपुर थाने की पुलिस ने आनंदपुर आग की घटना के सिलसिले में गोदाम मालिक गंगाधर दास को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी को बरुईपुर में उसके घर से दबोचा। गोदाम मालिक पर लापरवाही के कई आरोप हैं। गोदाम में इतने सारे मजदूर काम करते थे, लेकिन आग बुझाने का कोई यंत्र नहीं है। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। फायर विभाग आरोपी के खिलाफ नरेंद्रपुर पुलिस थाने में लापरवाही की शिकायत दर्ज किया गया। स्थानीय लोगों की माने तो इस हादसे में कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि घटनास्थल पर तलाश और बचाव अभियान लगातार जारी है। पुलिस के अनुसार, सोमवार तड़के करीब तीन बजे नाजिराबाद स्थित सूखे खाद्य पदार्थों के गोदाम में आग लगी थी। आग बुझाने के लिए करीब 15 दमकल गाडिय़ां दिन-रात जुटी रहीं। आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है, हालांकि अब भी कुछ स्थानों पर पॉकेट फायर मौजूद हैं, जिन्हें बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। इस हादसे के बाद पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ है। चारों तरफ मातम पसरा है और अपनों को खोने वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बताया जाता है कि पूर्व मेदिनीपुर जिले से ही लगभग 13 लोग अभी तक लापता है जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। अपने परिजनों को ढूंढने के लिए घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। कोई अपने भाई के बारे में पता करने तो कोई अपने पति के बारे में जानकारी हासिल करने पहुंच रहा है। दावा किया जा रहा है कि इन सभी से आखिरीबार रविवार की शाम को संपर्क हो पाया था। उसके बाद से कॉल करने पर मोबाइल न तो बज रहा है और कई लोगों के मोबाइल पर रिंग हो भी रहा है तो कोई जवाब नहीं दे रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि मृतक संख्या 30 हो सकती है। कारण इतने लापता लोग जो यहां कां करते थे उनसे सम्पर्क नहीं हो पा रहा है।
दमकल अधिकारियों ने भी माना है कि आग बुझाने की व्यवस्था पूरी तरह से नाकाम साबित हुई। उनका कहना है कि सुरक्षा इंतजाम अगर सही होते तो जानमाल का नुकसान इतना बड़ा नहीं होता। इस हादसे के बाद कई गरीब परिवार उजड़ गए हैं। जिन घरों में खुशी थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। आनंदपुर इस समय एक मृत्यु के शहर में बदल चुका है। राज्य के विद्युत मंत्री अरूप बिस्वास ने घटनास्थल का दौरा कर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने बचाव कार्यों का जायजा लिया और लापता लोगों के परिवारों से भी बातचीत की।आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। हालांकि, दमकल विभाग के अधिकारियों को आशंका है कि शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी हो सकती है।
स्थानीय लोगों, पुलिस व दमकल सूत्रों ने बताया कि, रविवार रात ईएम बाईपास के पास आनंदपुर के नाजीराबाद इलाके में पहले एक डेकोरेटर्स के गोदाम में आग लगी। देखते ही देखते आग पास के खाने-पीने के सामान वाले गोदाम तक फैल गई। कुछ ही मिनटों में आग की लपटों ने दोनों गोदामों को अपनी चपेट में ले लिया। गोदाम के अंदर काम कर रहे कई कर्मचारी आग की चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों और लापता कर्मचारियों के परिजनों का आरोप है कि गोदाम का दरवाजा बंद था, जिससे अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल सके। कई कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुछ अब भी लापता बताए जा रहे हैं। दमकल विभाग ने जेसीबी मशीन की मदद से जले हुए लोहे के ढांचे और मलवे को हटाना शुरू किया। इसके बाद अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभी भी कुछ लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। इस हादसे ने गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बताया गया है कि इतनी बड़ी फैक्ट्री में केवल 5 किलो के दो अग्निशमन यंत्र लगे हुए थे। उक्त खबर के लिखे जाने तक व अगलगी की घटना के लगभग 33 घंटे बीत जाने के बाद भी मलबे के ढेर से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई दे रही थी। लोगों में फैला आतंक जहां कम नहीं हो रहा था वहीं कथित तौर पर यहां काम करने वाले कई मजदूरों के लापता होने की बात लोगों में चर्चा का विषय रहा।
आज सुबह (मंगलवार) घटना स्थल पर जब फोरेंसिक टीम और प्रशासन के लोग पहुंचे तो एक वर्ग के लोगों में समसामयिक तौर पर गुस्सा फैला। आग के मलबे से बरामद किए गए आठ शव इस कदर झुलस चुके हैं कि उनकी शिनाख्त करना असंभव हो गया है। प्रशासन ने डीएनए और फोरेंसिक जांच के लिए अवशेषों को लैब भेजा है। वहीं लापता लोगों के परिजन मलबे के ढेर के पास खड़े होकर अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं, लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीदें दम तोड़ रही हैं। मंत्री की देरी और सियासी घमासान का दृश्य नजर आया मंत्री को देखते ही इलाका ‘गो बैकÓ के नारों से गूंजा। लोगों का कहना है कि हादसे के करीब डेढ़ दिन बाद आज दमकल मंत्री सुजीत बोस और विभाग के महानिदेशक (डीजी) रणबीर कुमार घटनास्थल पर पहुंचे। दमकल मंत्री के देरी से पहुंचने पर स्थानीय लोगों और भाजपा समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। बहरहाल जो भी हो लेकिन उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि मात्र 14 साल यानी देढ़ दशक से भी कम समय में महानगर कोलकाता की विभिन्न अगलगी की घटनाओं में 181 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। ज्यादातर घटनाओं में लापरवाही का बड़ा हाथ रहा है।
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