लखनऊ,31 जनवरी (आरएनएस)। आयुक्त, राज्य कर डा0 नितिन ने आज राज्य कर प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान, लखनऊ के कौटिल्य सभागार में टैक्स ऑडिट विंग के अधिकारियों के द्विवार्षिक क्षमता संवर्द्धन कार्यक्रम का समापन किया। इस नए पहल के तहत प्रदेश के टैक्स ऑडिट में तैनात सभी संयुक्त आयुक्त और उपायुक्त इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।आयुक्त डा0 नितिन ने अधिकारियों को कर निर्धारण और टैक्स ऑडिट में अंतर समझाते हुए कहा कि गुणात्मक टैक्स ऑडिट के माध्यम से राजस्व वृद्धि में योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीकी के इस युग में टैक्स ऑडिट की कार्यवाही को और प्रभावी बनाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए संबंधित व्यवसाय की कार्यक्षमता और संचालन प्रणाली का पूर्ण ज्ञान आवश्यक है।आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस दो दिवसीय प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान और अनुभवों को फील्ड में जाकर अपने साथियों के साथ साझा करें, ताकि विभाग को इसका व्यापक लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स ऑडिट में केवल करदाताओं द्वारा प्रस्तुत प्रपत्रों पर निर्भर न रहकर उनके डिजिटल डेटा का आधुनिक तकनीकी विश्लेषण कर ऑडिट रिपोर्ट तैयार की जाए, जिससे गुणात्मक टैक्स ऑडिट के साथ-साथ कर अनुपालन और राजस्व वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम में केन्द्रीय जी.एस.टी. प्रशिक्षण संस्थान नासिन के मास्टर ट्रेनर श्री विकास अस्थाना और श्री सुशील श्रीवास्तव ने उपस्थित अधिकारियों को केन्द्रीय जी.एस.टी. द्वारा अपनाई जाने वाली टैक्स ऑडिट विधियाँ और तकनीकें समझाई। इसके अतिरिक्त, उ0प्र0 राज्य फोरेंसिक विज्ञान संस्थान की श्रीमती पलक अनेजा ने डिजिटल फोरेंसिक की अवधारणाओं और उनके टैक्स ऑडिट में उपयोग पर प्रशिक्षण प्रदान किया।इस प्रकार, यह कार्यक्रम राज्य कर विभाग के अधिकारियों को आधुनिक तकनीक, गुणात्मक ऑडिट और डिजिटल विश्लेषण के माध्यम से टैक्स ऑडिट प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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