नई दिल्ली ,04 फरवरी (आरएनएस)। संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग ने एक नए ‘संग्रामÓ का रूप ले लिया। यह पूरा विवाद किताबों को लेकर शुरू हुआ, जिसने सदन के माहौल को इतना गरमा दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शाम 5 बजे होने वाला प्रस्तावित भाषण भी नहीं हो सका। दिन भर चले भारी हंगामे और शोर-शराबे के बाद लोकसभा की कार्यवाही को गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
नरवणे की किताब बनाम गांधी परिवार पर किताबें
सदन में विवाद की मुख्य वजह पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की किताब रही। राहुल गांधी इस किताब का हवाला देते हुए चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे थे। इसके जवाब में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भी पूरी तैयारी के साथ सदन में आए। उन्होंने सदन में गांधी परिवार पर लिखी गई कुछ किताबों का जिक्र किया और दावा किया कि इनमें कई आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। दुबे के इस बयान के बाद तो जैसे सदन में ज्वालामुखी फट पड़ा। विपक्ष ने इस पर तीखा एतराज जताया और भारी हंगामा शुरू कर दिया, जिसके चलते कार्यवाही को बीच में ही रोकना पड़ा।
स्पीकर के चैंबर तक पहुंची लड़ाई
निशिकांत दुबे के बयान से नाराज विपक्षी दलों के सांसद सीधे स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में पहुंच गए और वहां जमकर नारेबाजी की। विपक्ष का तर्क था कि जब राहुल गांधी को एक किताब पर बोलने से रोका गया, तो बीजेपी सांसद को दूसरी किताबों पर बोलने की इजाजत क्यों दी गई? स्पीकर के ऑफिस में कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने अपना विरोध दर्ज कराया। इस बीच, गृह मंत्री अमित शाह ने संसद भवन में पीएम मोदी से मुलाकात की और बाद में स्पीकर ओम बिरला के साथ भी बैठक की, जिसमें निशिकांत दुबे भी मौजूद थे।
‘पीएम आते तो मैं उन्हें किताब देताÓ
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राहुल गांधी ने सरकार और प्रधानमंत्री पर तंज कसना जारी रखा। नरवणे की किताब हाथ में लेकर संसद पहुंचे राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि आज प्रधानमंत्री सदन में आएंगे। उन्होंने कहा कि अगर पीएम संसद आते, तो मैं खुद उन्हें यह किताब भेंट करता। राहुल गांधी लगातार इस किताब के जरिए सीमा सुरक्षा और चीन के मुद्दे पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल, किताबों को लेकर छिड़ा यह सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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